Friday, November 27, 2020

वलसाड जिले में अवैध निर्माणो पर चला बुलडोजर...! भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर कार्यवाही कब..?

वलसाड जिले में आज कुछ महीनो से लगातार अवैध निर्माण बताकर नगरपालिका के चंद अधिकारियों ने दिल खोलकर बुलडोजर चलवाकर अपने आप को कमिश्नर राव की पदवी हासिल कर रहे हैं। यह एक ऐतिहासिक फैसला बनाव बन चुका है। और गुजरात के उच्च न्यायालय ने शायद कुछ इसी तरह का फैसला भी सुनाया होगा। जिसके ऊपर सवाल उठाना लाजमी नही होगा। परंतु जमीनी हकीकत में इसका दूसरा पहलू भी आज जानना जरूरी है। आज वलसाड नगरपालिका वर्षों से भ्रष्टाचार के दलदल में फसा हुआ है? वलसाड नगरपालिका करोड़ो रुपया नागरिकों के पास पीने का पानी का बिल वसूल करता है। यदि किसी गरीब का बाकी रहा तो पूरी फौज कनेक्शन काटने पहुंच जाती है। परंतु उसकी सच्चाई यह भी है कि वलसाड नगरपालिका करोड़ों रूपया अंबिका डिवीजन का अभी तक भरा नही है। नागरिकों से वसूला हुवा रूपया कहां गया.. ? जमीन खा गई कि आसमान निकल गया। उस करोड़ो रूपये का खर्च किसी और जगह करना सीधे सीधे भ्रष्टाचार है। आज यदि एक और सिंघम राव बनकर उस कचेरी में आ जाये और बिना बिल भरे पानी न दे तो लोगो को पानी के विना रहना पड़ेगा। और सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक नगरपालिका को भी इसके एवज में लिल्लाम किया जा सकता है।
मिली जानकारी के अनुसार वलसाड नगरपालिका की पूरी बिल्डिंग से लेकर अधिकारी तक भ्रष्टाचार से घिरे हुए हैं। कायदा कानून की सबक बताने वाले अधिकारियों ने आज तक सेवा का अधिकार अधिनियम 2013 से अनजान हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 यहां अभी तक लागू नही हुआ। कर्मचारियों का यहाँ जमकर शोषण किया जाता है। गरीबो का यहाँ लघुतम वेतन ईएसआई, जैसी सामान्य सुविधाओं से वंचित रखा जाता है।सामान्य  वेतन तक नही दिया जाता। भ्रष्टाचार अधिनियम 1986 यहाँ एक गुनाह माना जाता है। एक सामान्य दुकान अवैध कैसे बन जाती है। पहले इसे बनाने के लिए गरीबो के पास निर्माताओ बिल्डरो के पास पूजा करवाया जाता है। आरती करवाया जाता है। और ऐसा करते करते वर्षो निकल जाते हैं। फिर अब अपने आप को सिंघम और राव की भूमिका में उसी का भाई एक अधिकारी हवन कर देता है। आज लगभग वलसाड जिले की नगरपालिका विस्तार में 90 प्रतिशत इमारते गैरकानूनी हैं। और यहाँ कारदे कानून के जानकारों की माने तो एक ईंट बिना अधिकारियों के मिलाभगत के रखा नही जा सकता। सभी रोड लगभग हर वर्ष क्षतिग्रस्त नजर आते हैं। उसका मुख्य कारण भी इंजीनियर के भ्रष्टाचार के बिना संभव नही है। एरकंडीशन जब कलेक्टर तक को सुविधा नही दी गई है। फिर नगरपालिका में कैसे शुरुआत हो जाती है। सरकार का एक नियम ऐसा है कि किसी भी कर्मचारी व अधिकारी को दो से पांच वर्ष से ज्यादा चिकित्सा क्षेत्र के अलावा नही एक जगह नही रखा जा सकता फिर ए कानून नगरपालिका में क्यों नही ? नगरपालिका क्या गुजरात और भारत सरकार से अलग है ? कमि्श्नर एडमीनीश्ट्रेशन कार्यालय नगरपालिका गांधीनगर के कायदे आदेश हों या गुजरात सरकार के  यहाँ  अभी तक ए अधिकारी गण अपने हिसाब से मानते हैं। 

Tuesday, November 24, 2020

कोरोना अभी जिन्दा है.. महामारी अभी बाकी है... सुरक्षा, शान्ति, सुपाच्य भोजन, स्वदेशी में समझदारी- लोकरक्षक हेल्थ केर नवसारी गुजरात

कोरोना अभी जिन्दा है.. महामारी अभी बाकी है...
 सुरक्षा, शान्ति, सुपाच्य भोजन, स्वदेशी में समझदारी- 
लोकरक्षक हेल्थ केर नवसारी

     आज एक बार पुनः गुजरात के कई प्रमुख शहर अहमदाबाद, सूरत,राजकोट आदि पर कोरोना वायरस अपनी मौजूदगी ,विकराल स्वरूप में दर्ज करवाई है। और अहमदाबाद में अपने पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। और इसकी वजह मात्र लापरवाही मानी जाती है। सूत्रों के हवाले से चर्चित खबरो की माने तो इसमें शासन प्रशासन के द्वारा की गई रैलियों में पूरे देश में चुनाव में कोरोना संक्रमण की सुरक्षा नीतियों की ऐसी की तैसी करना प्राथमिकता से माना जाता है। इतनी विकराल भीड़ को वारंवार प्रतिदिन और किसी भी प्रकार के प्रतिबंध न होने के बावजूद कोरोना संक्रमण की गैरमौजूदगी से सामान्य नागरिकों में भय खत्म होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे नकारा भी नही जा सकता। नेतागण जहाँ जहाँ गये हजारों से लाखो की भीड़ लगभग बिना किसी मास्क और शोशियल डिस्टेंस की देखी गई। और सरकार के साथ कोरोना महामारी के सभी नियम राजनेताओं के सामने नतमस्तक नजर आये। और दिलचस्प नजारा देखा गया कि वायरस भी नजदीक आने तक ही हिम्मत नही किया। और अब जब चुनाव की सभी प्रकृया लगभग शान्त हो चुकी है तत्काल कोरोना वायरस अपने विकराल रूप में प्रगट हो चुका है। और यह नजारा भारत ही नही अमेरिका जैसे महान वैज्ञानिक देशो में देखा गया। और खासकर यहाँ किसी प्रकार से दुष्प्रचार भाव में लेने की जरूरत नही है। और न ही कोरोना जैसी महामारी के बारे में कम करके आकने का कोई उद्देश्य है। परंतु हकीकत से मुंह मोड़ा नही जा सकता। कोरोना वायरस जैसी महामारी संक्रमण से सुरक्षा के नियमो के साथ खान-पान, रहन- सहन में बदलाव लाने की सख्त जरूरत है। बाहर अथवा घर पर आप कहीं भी रहें सुपाच्य भोजन सभी बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए आयुर्वेद में प्राचीन समय से उल्लेख किया गया है। आहार आपकी सर्वश्रेष्ठ औषधि है। पश्चिमी सभ्यता में रहन सहन और खान पान से सर्वाधिक बीमारियों का जन्म होता है। भारतीय पूर्वजों और ऋषियों के आहार विहार खान पान पद्धतियों को पुनः अपनाने की अत्यंत आवश्यकता है। भारत वर्ष जड़ी बूटियों का देश है। हजारो वर्ष पहले से इन्हीं जड़ी बूटियों के प्रयोग से सभी असाध्य बीमारियों से मुक्ति प्राप्त करने का विवरण आज भी विद्यमान है। आज पुनः भारत को विश्व गुरु बनाने में इनके सिवा कोइ विकल्प नही है। आधुनिक वैग्यानिक पद्धति के साथ यदि इसे जोड़ दिया जाये फिर भारत जैसे विशालकाय देश के सामने दूर दूर तक कोइ नजर नही आता। सरकार को भी इस दिशा में प्राथमिकता से विचार कर काम करने की जरूरत बताई जाती है। विकास समृद्धि सरकार स्वास्थ्य के विना एक जुमला है। क्योंकि इसके सभी शाष्त्रो में उल्लेख है कि पहला धन निर्मल काया यानी स्वास्थ्य ही है। सभी नागरिकों को सकारात्मक दृष्टिकोण से सोचने और काम करने की जरूरत है। जागरूकता अभियान अभी तक सभी क्षेत्रों में अग्रसर पाये जाने का इतिहास है।नियम और कानूनो को तोड़ने की मानसिकता प्राचीनकाल से पायी जाती है। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण गुजरात के दारूबंदी से भी देखा जा सकता है।और इसे यदि आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाय तो जहाँ जितने सख्त नियम निर्मित हैं। उतने ही जोर से तोड़ने को यहाँ अक्सर कामयाबी समझा जाता है।अब इसे हर क्षेत्र में देख सकते हैं। आज महिलाओं के सभी प्रकार के शोषण भी जानकार और आध्यात्मिक वैग्यानिक इसी क्रम में मानते हैं।  सरकार के सभी नियमो को पालन करने के लिए सभी क्षेत्रों, धर्मगुरुओं , नेताओं समाज के अग्रणियो के साथ शोशियल मीडिया के धुरंधरो को सबसे पहले जागरूकता अभियान में लाने के साथ बढ़चढ़कर हिस्सा लेने की जरुरत है। और सरकार को सख्ती से ऐसे जागरूकता अभियान में एक बार अवश्य सोचना चाहिए।
नवसारी जिले में जब से नवसारी नगरपालिका में विजलपोर के साथ आठ ग्राम पंचायतों को समाविष्ट किया गया । तभी से यहाँ कोरोना संरक्षण रोकथाम के उपाय को ही कोरोन्टाइन कर दिया गया है। पहले एक केस आने पर ही साफ सफाई दवा का छिड़काव किया जाता था। अब यह सभी काम सिर्फ़ गैरकायदेसर एरकंडीशन में ही कर लिया जाता है। नवसारी जिले में रिकवरी रेट गुजरात में सर्वश्रेष्ठ है। जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करते हैं। नवसारी जिले में तीन चौथाई से ज्यादा नागरिकों की जवाबदेही सर्वोच्च अधिकारी श्री नागरिकों से मिलने को गुनाह समझा जाता है। अभी तक चल रही खबरो के अनुसार नवसारी जिला पंचायत में गुजरात विकास कमिश्नर के हुक्मो को अनादर करने को प्राथमिकता दी जाती है। 

Saturday, November 7, 2020

मार्ग और मकान स्टेट में कायदे कानून की उड़ रही हैं धज्जियां..! RTI की ऐसी की तैसी कर रहे नवसारी जिले के विभागीय अधिकारी श्री ....? करोड़ो रूपये के ग्रान्ट का अधिकारियों ने जमकर तला पकौड़ा..? जवाबदेही किसकी ?

 
मार्ग और मकान स्टेट में कायदे कानून की उड़ रही हैं धज्जियां..! 
RTI की ऐसी की तैसी कर रहे मार्ग और मकान के अधिकारी श्री ..?
सरकार के करोड़ो रूपये के ग्रान्ट का अधिकारियों ने जमकर तला पकौड़ा..? जवाबदेही किसकी ?
        गुजरात राज्य आज सबसे समृद्ध विकास शील और पारदर्शक सरकार के रूप में पूरी दुनिया में प्रख्यात है। परंतु जमीनी हकीकत में एक अर्शे से यहाँ आरक्षण और बापु दर्शन वाले अधिकारियों ने कब्जा कर बदनाम कर रखा है। और आज परिणाम बहुत ही खतरनाक मिल रहा है।चंद अधिकारियों ने इस विभाग को भ्रष्टाचार का पूरा बाजार बना दिया है। गुजरात सरकार कोरोना जैसी बीमारी जैसे निपटने के लिए एडी चोटी का जोर लगाकर रखा है। और सरकार की नीति और किये गये कामो की जितनी सराहना किया जाये कम है। परंतु यह अभी संचालन करने के लिए सरकार के चंद सर्वोच्च अधिकारी इसे आरक्षण और बापु दर्शन से आये अधिकारियों ने इसे भ्रष्टाचार के मार्केट में उतार दिया है। मार्ग और मकान राज्य की अधीक्षक इजनेर वर्तुल कचेरी सूरत जो करीबन पांच जिलो से जुड़ी हुई है। भ्रष्टाचार की फरियाद यहाँ करोड़ों से शुरुआत होती है। सूत्रों के हवाले से मिल रही खबरो के अनुसार इस कार्यालय में जवाबदार अधिकारी ढूढ़ना चंद्रमा को धरती पर उतारने के बराबर माना जाता है। भ्रष्टाचार विरुद्ध भारत सरकार की सबसे बड़ी योजना मानी जाती है। परंतु उसे भी अभी मंगल जैसे अग्नि कारक ग्रह से जोड़कर देखा जा रहा है। गुजरात में ऐसी योजना जिसका संचालन करने मात्र से बड़े बड़े धुरंधर राजनेता से लेकर सर्वश्रेष्ठ अधिकारी तक फसते नजर आ रहे हैं। इसलिए उसे भी अभी अमलीजामा पहनाना बिल्ली के गले में घंटी बांधने जैसा मुहावरा सिद्ध होता नजर आ रहा है।मार्ग और मकान राज्य की कचेरी में आज कुछ ऐसा नजारा सामने आया है। इस महत्वपूर्ण कार्यालय में भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर चल रही खबरों के सत्यापन के लिये सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के द्वारा एक सूचना नवसारी वलसाड सूरत तापी और डांग जिले से मागी गयी है। जिसमे मिल रही सूचना के अनुसार आरक्षण के साथ सेटिंग डोट कोम वाली वेबसाइट अपनी चरमसीमा पर जमकर कार्यरत है। यहां ज्यादातर जवाबदार  जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारी करार आधारित अथवा इनचार्ज हैं । कोरोना जैसी महामारी यहां भ्रष्टाचार के सामने अदना साबित हो चुकी है।वलसाड नवसारी  और सुरत जैसे जिलो में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। 
                             आधुनिक शोधकर्ताओ ने भी माना कि यह भ्रष्टाचार वाली बीमारी प्राचीनकाल से चली आ रही है और अभी तक इसके कई रूप मिल चुके हैं। यह दिमाग पर ज्यादातर असरकारक है। यह एक बार जब पकड़ ले फिर यह धन इकट्ठा करने वाली बीमारी निधन के पहले छोड़ नही सकती है। और इसी जाल में इसी बीमारी का शिकार आज मार्ग और मकान ( स्टेट )की कचेरी हो चुकी है। गुजरात राज्य के सीमावर्ती जिले जैसे नवसारी, वलसाड, सूरत, तापी और डांग सूरत वर्तुल कचेरी के अंतरगत आते हैं। गरीबो, मजदूरो, महिलाओं आदिवासियों, आर्थिक पछात ,दलितों को सर्वाधिक रोजगार देने वाला यह सर्वश्रेष्ठ विभाग है। यहाँ हर काम में ज्यादातर इसी वर्ग से लोग काम करते नजर आते है। और सरकार आज इन्ही का मसीहा होने का दावा करती है। दावा ही नही करती कई नियम भी बनाए है। आजादी के बाद तत्काल सरकार ने लघुतम मासिक वेतन अधिनियम 1948 बनाया। जिसे आज तक हर तीसरे महीने समीक्षा कर सभी जिलो में जिला कलेक्टर के साथ श्रम रोजगार मंत्रालय भारत और राज्य सरकार के द्वारा सभी कचेरियों में भेजा जाता है।आज इसे 72 सालो के बाद भी ऐसा कानून जिसके बारे में यहां अधिकारी न जानते हैं और न ही मानने को तैयार नजर आते हैं। जब कि इस कायदे की किताब में अंग्रेजी भाषा में लिखी लाइनो को पढ़े उसमे स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कोन्ट्राक अथवा किसी भी माध्यम से आया हुआ हर मजदूर अथवा कर्मचारी को मिल रहे वेतन और सभी प्रकार की सुविधाएं सुनिश्चित करने की संपूर्ण जवाबदेही उस कार्यालय के प्रिंसिपल एम्पलोयर यानी मुख्य अधिकारी की है। और अभी कोरोना जैसी महामारी में सभी मजदूरों का बीमा करना अनिवार्य हैं। जानकारो की माने तो यह सभी ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। और यहाँ अधिकतर अधिकारियो को गुजराती भाषा में फाफा है। अंग्रेजी कहां खरीदने जायें।  और वह मिल भी नही पाती। हालत यहाँ तक पहुंच चुकी है कि यहां एक वलसाड जिले के कार्यपालक इजनेर ने अरजदार के दिये गये पते में संस्था को अरजदार मानकर सीधा सूचना देने से इनकार ही कर दिया । जानकारो से पता चला कि सदर महाशय ऐसे ही हर जगह उल्टे सीधे अंट शंट जवाब देते हैं। और उन्हे भी गैरकायदेसर जबरन बैठा दिया है। हकीकत में वर्ग एक का अधिकारी का कार्यभार वर्ग एक को देने की परंपरा पूरे गुजरात में है। परंतु मार्ग और मकान स्टेट की कचेरी इस नियम को नही मानती। जबकि नवसारी जिले में चल रहे कायदे की माने तो कलेक्टर का चार्ज अधिक कलेक्टर को आज तक नही दिया गया ।जबकि हकीकत में लगभग सभी काम अधिक कलेक्टर के पास ही करवाया जाता है। और यहाँ जागृत नागरिकों में चल रही लोक चर्चा की माने तो यहाँ भारत सरकार हो राज्य सरकार के कायदे की मान्यता समयानुसार बदल दिया जाता है। इस कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 हो या सेवा का अधिकार 2013, लघुतम मासिक वेतन अधिनियम 1948 हो या भ्रष्टाचार अधिनियम 1986,कर्मचारी राज्य बीमा निगम के नियम हो या गुजरात राज्य सेवा वर्तणुक नियम 1971 जन हित ,भ्रष्टाचार संबंधित जैसे नियम यहाँ नही माने जाते। अब देखना दिलचस्प होगा कि सदर कचेरी के द्वारा किये गये बिल्डिंगो और बनाये गये रोडो में कितनी बार और किस प्रकार से जांच किये गये हैं। आज तक सबसे कम समय में बिल्डिंग इसी विभाग की बनाई गई या तो गिर जाती है या क्षतिग्रस्त हो जाती है। रोडो की हालत हर साल बिगड़ जाती है। यहाँ वैसे दर्जनो इंजीनियर काम करते हैं। 
                    नवसारी जिला जो सदियों से संस्कारी नगरी के रूप में प्रख्यात था आज इसे भ्रष्टाचार की नगरी में ऐसे चंद अधिकारियो ने तब्दील कर चुके हैं । नवसारी जिले के चिखली  के  विभागीय अधिकारी श्री तो सीधा सरकार के द्वारा दिये गये जमीन पर जबरन कब्जा करने की खबरे आज चर्चित हो चुकी हैं। वैसे सूचना का अधिकार जिसे भूतपूर्व प्रधान मंत्री श्रीने कहा था कि आर.टी.आई से भ्रष्टाचार कम हुवा वही लोकनायक  युग पुरूष के रूप में चर्चित प्रधान मंत्री श्री मोदी जी ने एक  सभा को संबोधित करते हुए कहा है कि आरटीआई का मतलब सवाल पूछने का अधिकार। परंतु यहां आरटीआई का यहां पूरा मतलब ही अलग कर दिया है। आज सरकार की सभी कोशिशे और कानून कोरोना ग्रस्त हो चुकी है। सरकार को फिलहाल नये ढंग से पुन: सोचने की जरूरत मानी जाती है।  इस समाचार की कितनी गंभीरता ली जाती है सभी पाठकों और जांच कर्ताओ की नजर अवश्य रहेगी।

Wednesday, November 4, 2020

નવસારી જિલ્લા પંચાયતના અધિકારીઓની કચેરી અને વાહનોથી ગૈરકાયદેસર એસી ગુજરાત વિકાસ કમિશ્નરશ્રી કઢાવી શકશે ખરાં.......?





નવસારી જિલ્લા પંચાયતના અધિકારીઓ ગુજરાત વિકાસ કમિશનરના હુકમ મુજબ પોતાની કચેરી માં થી ગૈરકાયદેસર એસી કઢાવી વેતન માં થી વીજ બિલ ભરી ઈમાનદારી બતાવશે ખરાં..?

નવસારી જિલ્લાના જિલ્લા પંચાયત માં આજે વર્ષો પછી કર્તવ્યનિષ્ઠ,ઈમાનદાર, શૈક્ષણિક લાયકાત ધરાવતા, કાયદા કાનૂનનો વિશેષ જાણકાર, ગુજરાત એડમીનિસ્ટ્રેશન સર્વિસ, ઇન્ડિયન એડમીનિસ્ટ્રેશન સર્વિસ, જીપીએસ સી વગેરે સર્વોચ્ચ ડિગ્રી થી સંમાનિત, હિસાબ કિતાબ થી પારંગત, માહિતી માગનાર અરજદારોને દરેક મુદ્દે સુપ્રીમ કોર્ટ નો હુકમનો પાઠ ભણાવતા, ગુજરાતી, હિન્દી, અંગ્રેજી ભાષાનો જાણકાર,લોકપ્રિય ,ઈમાનદાર, નવયુવાન વગેરે તમામ સર્વોચ્ચ હોદ્દેદારોના પ્રિય અધિકારીઓ ગુજરાત વિકાસ કમિશનર શ્રી દ્વારા કરવામાં આવેલ હુકમ મુજબ પોતાની કચેરી અને વાહનોથી ૩૧જાન્યુઆરી સુધી ગૈરકાયદેસર એરકંડીશન કાઢવામાં નિષ્ફળ ગયા છે. સૂત્રો દ્વારા મળેલ ફરિયાદ મુજબ સદર અધિકારી શ્રીઓની કચેરીમાં એરકંડીશન જે લગાડવા માં આવેલ છે એ ગુજરાત વિકાસ કમિશનર શ્રીના હુકમ અને નાણાં મંત્રાલય ભારત સરકારના કાયદા મુજબ ગૈરકાયદેસર છે. જેના અનુસંધાન માં પર્યાવરણ માનવ અધિકાર સંસ્થા અને લોકરક્ષક સમાચાર પાસે ફરિયાદ કરવામાં આવી છે. અને એ ફરિયાદના અનુસંધાન માં મૌખિક લેખિત કે આરટીઆઈ દ્વારા માહિતી માગવામાં આવી હતી. પરંતુ છટકબારી કરતા સદર અધિકારીશ્રીઓ એ ગુજરાત વિકાસ કમિશનર શ્રીના હુકમનો અપમાન કરી રહ્યા છે. જે સ્પષ્ટ સાબિત થઈ રહ્યો છે. અને કાયદા ના રૂ એ આજે જ્યારે ભારત દેશ કોરોના જેવી મહામારી માં આર્થિક તંગી માં પસાર થઈ રહ્યો છે. બે વખતનો ભોજન આપવામાં સરકાર પણ ભરસક પ્રયાસ કરતા નિષ્ફળ થઈ રહી છે.બેરોજગારી,ભ્રષ્ટાચાર થી ,ગરીબ ,આદિવાસીઓ, ખેડુતો ત્રાહિમામ થવા પામ્યા છે. એવા સંજોગોમાં એવા અધિકારીઓને નોકરી ઉપર રાખવા ત્યારે જ્યારે ભારત માં કરોડો શૈક્ષણિક લાયકાત ધરાવતા નાગરિકો બેરોજગાર છે એ પણ ગુનો નજરે પડે છે. નવસારી જિલ્લા પંચાયત માં હિસાબ કરનાર અધિકારીઓની ભરમાર છે. છતા અજુ સુધી હિસાબ કિતાબના માટે મુકવામાં આવેલ અધિકારીઓ જ ગૈરકાયદેસર એસી કાઢી પોતાના વેતનથી સરકારની તિજોરી માં વીજ બિલ ન ભરતા હોય ત્યારે એવા અધિકારીઓની જરૂર ખરી..? જાણકારોના મંતવ્ય અને થતી ફરિયાદ મુજબ નવસારી જિલ્લાના જિલ્લા વિકાસ અધિકારી શ્રી જેની આજ સુધીની કામગીરી ખરેખર કાબીલે તારીફ છે. પોતાના મળેલ સત્તા અને ભારતની આર્થિક તંગીના માહોલ માં સદર હિસાબ કિતાબ રાખનાર અધિકારીઓ અને કાયદા કાનૂન નો જાણકાર અધિકારીઓની કચેરી માં થી તત્કાળ એસી કઢાવવા અને આજ સુધીના વીજ બિલ એમના વેતન માં થી ભરપાઈ કરવા હુકમ કરશે ખરા ? જાહેર સેવાઓ અંગે નાગરિક અધિકાર અધિનિયમ ૨૦૧૩ ની અમલીકરણ ન કરાવી શકનાર અધિકારીઓની સક્ષમતા ઉપર સવાલિયા નિશાન ઉભો થયો છે. એજ રીતે ગુજરાત વિકાસ કમિશ્નર શ્રી પોતાના જ હુકમ નો પાલન માં દસ દિવસ ના બદલે દસ માસ માં ન કરાવી શકે ત્યારે અને જ્યારે ગુજરાત આજે કોરોના મહામારી થી આર્થિક તંગી માં પસાર થઈ રહ્યો છે એની સક્ષમતા ઉપર પણ સવાલ થઈ રહ્યો છે.લોકચર્ચા મુજબ આજે ગુજરાત માં યોગી સરકાર ની જરૂર જણાઈ રહી છે. જેમાં કોઈ પણ હોદ્દો ધરાવતા અધિકારી કાયદા કાનૂન નો પાલન કરવા કે કરાવવા માં નિષ્ફળ જાય ત્યારે એવા અધિકારીઓ ને કોઈ પણ તપાસ કે સમય આપવા વગર સ્વેચ્છિક રાજીનામુ ઉપર સહિઓ કરાવી લેવામાં આવે છે. આજે એવા કાયદોની ગુજરાત માં અત્યંત જરૂર છે. ભ્રષ્ટાચાર મટાડવા વગર સરકાર કોઈ પણ સંજોગોમાં વિકાસ કરી શકે નહીં. નવસારી જિલ્લા પંચાયત માં ભ્રષ્ટાચાર સદંતર બંધ કરવા માટે આજે વર્ગ એકના અધિકારીઓ માં ફેરફાર કરતા એના કામોની તપાસ અને કાર્યવાહીની જરૂર છે.નવસારી જિલ્લા પંચાયત માં પહેલી વાર નાગરિકો પોતાના તકલીફો મુશ્કેલીઓ લઈ અધિકારીઓ પાસે જઈ શકે નહીં. અધિકારીઓ જ જ્યારે નાગરિકો ને મળવા ન માગતા હોય ત્યારે એવા અધિકારીઓ ની જરૂર ખરી ? હવે સમાચારની ગંભીરતા થી અધિકારીઓ વિચાર કરી પોતાના કાર્યશૈલી માં પરિવર્તન લાવશે કે યોગી સરકાર ના નિયમો લગાડવા માટે સરકાર ને બાધ્ય કરશે એ જોવાનુ બાકી રહ્યુ..


नवसारी शहर में बंदर रोड की हालत गंभीर

नवसारी गुजरात राज्य की सबसे महत्वपूर्ण एवम ऐतिहासिक संस्कारी नगरी के रूप में मानी जाती है। परंतु कुछ वर्षों से इस पर कुछ असामाजिक तत्वों के ...