Sunday, March 10, 2019
નવસારી જિલ્લા માં આરોગ્ય વિભાગ લકવાગ્રસ્ત...! જવાબદાર કૌણ...?
નવસારી જિલ્લામાં આજે 70 વર્ષે પૂર્ણ થતાં લધુત્તમ માસિક વેતન ધારો 1948 લાગુનથી ! ગુજરાત માટે દુર્ભાગ્ય પૂર્ણ અને શરમજનક.જવાબદાર કૌણ..? શાસન કે પ્રશાસન ?
Saturday, March 9, 2019
उत्तर प्रदेश सुलतानपुर एलपीजी गेस वितरण व्यवस्था का पर्दाफाश..! अधिकारीयो के मिलीभगत का अंदेशा..? जवाबदार कौन..?
सुलतानपुर जिला आपूर्ति विभाग का हुआ पर्दाफाश ...! अधिकारियों के मिलीभगत का अंदेशा ...? जवाबदेही किसकी.....?
भारत सरकार उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की शशक्तिकरण पर कितनी भी बडी योजनाएं बनाये। परंतु जब तक व्यवस्था परिवर्तन मे सुधार नहीं लायेगी तब तक सरकार के अधिकारी सरकार को बदनाम करते रहेगें। आज रात दिन सरकार भले कडी मेहनत करें। कितने कायदे बनाये। ढाक के तीन पात ही नजर आ रहे हैँ। उज्जवला योजना के तहद सरकार ने करोडो रुपये खर्च कर रही है। महिलाओं के विकास मे सरकार दिन रात मेहनत कर रही है। परंतु जिले के आपुर्ति विभाग के अधिकारी हैँ कि सुधरने के लिए किसी भी हालत मे तैयार नही है। अभी एक नया मामला सुलतानपुर के लम्भुआ थाने के अन्तर्गत श्री शम्भू इन्डेन सर्विस रानीगंज का एलपीजी गेस वितरण एजेंसी का आया है। एक एलपीजी गेस एजेंसी जो अपने आप को मालिक समझ बैठे है। अधिकारीयो से सेटिंग डोट कोम के तहद समझौता कर कर भूल गये कि इनकी कही हर बात को तीसरी आंख से कोई और भी देख रहा है। घर घर डिलवरी करने के लिए सरकार द्वारा एग्रीमेंट करने के बाद भूल गये कि एलपीजी गेस सिलेंडर को घर घर पहुंचाना भी पडे़गा। लम्भुआ के सदर एलपीजी गेस वितरक की फरियाद को लेकर जब गैस वितरक एजेन्ट से पर्यावरण मानवाधिकार संस्था अध्यक्ष लोक रक्षक समाचार के सम्पादक से टेलीफोनिक मुलाकात मे पूछा गया । उन्होंने बताया कि घर घर पहुचाना संभव नही।और सरकार के द्वारा इन्हें एजेंसी सिर्फ अपनी शर्तों पर ही देती है। शायद इन्हें इस एलपीजी गेस सिलेंडर के संबंधित अधिकारियों ने नही बताया होगा कि यदि घर घर न पहुंचाया जाये तब ग्राहक को रूपया बीस कम लेना होगा। और टेलीफोनिक पूछताछ मे खुद यह भी कबूल किया कि आज तक ज्यादातर भरे सिलेंडर को बिना बुक किये दे चुके है। अब भारत सरकार द्वारा सबसिडी किस एकाउंट मे जमा होता है। इसकी जांच किस किस अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। आज इतने बडे भ्रष्टाचार मे अधिकारीयो की मिलीभगत के बिना संभव नही हो सकता। एरिया ओफीसर अपने आप को पाक साफ बताते हुए भूल गये कि जाच करने की जवाब देही उनकी भी है। और उनसे बडे अधिकारी श्री के बातचीत मे उनके मिलीभगत स्पष्ट जाहिर हो रही है। मीडिया के संपादक को कायदे का पाठ पढाने वाले अधिकारी को आज यह जानने की जरूरत है कि योगी सरकार के पास नोट छापने की मशीन नही है।न ही भारत सरकार को स्वयं संबिधान इजाजत देता है। आज भारत सरकार सबसे ज्यादा कर्जदार है। इन्डियन ओइल भारत सरकार के अन्तर्गत कार्य करती है। जिसमे राष्ट्रपति के नाम और प्रधानमंत्री श्री मुख्यतः अध्यक्ष की भूमिका मे होते हैँ। संबंधित अधिकारी गण को आज जानना जरूरी है कि उन्हें मिलने वाला वेतन और राजाशाही जैसी सुविधाओं मे गरीब मजदूर किसान के रात दिन मेहनत मसक्कत की कमाई और खून पसीने से आती है। ऐसी गैस वितरण एजेंसियों को तुरंत बंद कर देना चाहिए जो ग्राहकों के घर पर डिलवरी न देकर रोड पर दो किलोमीटर घर से दूर दे रही हैं। सुलतानपुर जिले के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट समाचार की गंभीरता को संज्ञान मे लेते हूए तत्काल जाच करवाने की जहमत उठाने की कृपा करें। जिसकी आज जरूरत और समय की मांग भी है।
Friday, March 8, 2019
सुलतानपुर जिला आपुर्ति विभाग का हुआ पर्दाफाश..! जवाबदार कौन...?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मां नवसारी जिला अन्य भाषा भाषी सेल के जिला अध्यक्ष
Wednesday, March 6, 2019
દક્ષિણ ગુજરાત વીજ કંપની લી.નવસારી માં આરટીઆઈ ૨૦૦૫ અને ગરીબો માટે અલગ કાયદાઓ ..? જવાબદાર અધિકારી ક્યાં છે...?
નવસારી જિલ્લામાં કરોડો રૂપિયા આવક ધરાવતી દક્ષિણ ગુજરાત વીજ.કંપની લી. માં દર રોજ નવી નવી ફરિયાદો થઈ રહી છે. ખેડુતો જે આજે ભારત નો અન્નદાતા છે. એમને બીજ. કનેક્શન લેવા માટે વર્ષો સુધી રાહ જોઈ પડે છે. અને છેલ્લે ગેરકાયદેસર અધિકારીઓ થી સેટિંગ કરી બીજ કનેક્શન લઈ પોતાની ખેતી માં પાણી પુરુ પાડી રહ્યા છે.
Tuesday, March 5, 2019
मोदी के नाम करोड़ों खर्च के गांधी के नाम पर..?
Monday, March 4, 2019
शिवरात्रि का इतिहास और शिवजी को प्रसन्न करने का उपाय
शिवरात्रि का इतिहास और शिवजी को प्रसन्न करने का उपाय
तीनों लोकों के मालिक #भगवान #शिव का सबसे बड़ा त्यौहार #महाशिवरात्रि है । #महाशिवरात्रि #भारत के साथ कई अन्य देशों में भी धूम-धाम से मनाई जाती है ।*
‘स्कंद पुराण के ब्रह्मोत्तर खंड में शिवरात्रि के #उपवास तथा #जागरण की महिमा का वर्णन है :*
*‘‘शिवरात्रि का उपवास अत्यंत दुर्लभ है । उसमें भी जागरण करना तो मनुष्यों के लिए और भी दुर्लभ है । लोक में ब्रह्मा आदि देवता और वशिष्ठ आदि मुनि इस चतुर्दशी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं । इस दिन यदि किसी ने उपवास किया तो उसे सौ यज्ञों से अधिक पुण्य होता है ।*
शिवलिंग का प्रागट्य!!*
*पुराणों में आता है कि ब्रह्मा जी जब सृष्टि का निर्माण करने के बाद घूमते हुए भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो देखा कि भगवान विष्णु आराम कर रहे हैं। ब्रह्मा जी को यह अपमान लगा ‘संसार का स्वामी कौन?’ इस बात पर दोनों में युद्ध की स्थिति बन गई तो देवताओं ने इसकी जानकारी देवाधिदेव #भगवान #शंकर को दी।*
भगवान शिव युद्ध रोकने के लिए दोनों के बीच प्रकाशमान #शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए। दोनों ने उस #शिवलिंग की पूजा की। यह विराट शिवलिंग ब्रह्मा जी की विनती पर बारह ज्योतिलिंगो में विभक्त हुआ। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवलिंग का पृथ्वी पर प्राकट्य दिवस महाशिवरात्रि कहलाया।*
बारह ज्योतिर्लिंग (प्रकाश के लिंग) जो पूजा के लिए भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केंद्र हैं। वे स्वयम्भू के रूप में जाने जाते हैं, जिसका अर्थ है "स्वयं उत्पन्न"।*
1. #सोमनाथ यह शिवलिंग गुजरात के सौराष्ट्र में स्थापित है।*
2.श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है।*
*3. #महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।*
4.ॐकारेश्वर मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदान देने हेतु यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।*
5. #नागेश्वर गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।*
6. बैजनाथ बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।*
7. #भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।*
8.त्र्यंम्बकेश्वर नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।*
9. घुश्मेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग।
10. #केदारनाथ हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। हरिद्वार से 150 पर मिल दूरी पर स्थित है।*
11. #काशी विश्वनाथ बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।*
12. #रामेश्वरम् त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।*
*दूसरी पुराणों में ये कथा आती है कि सागर मंथन के समय कालकेतु विष निकला था उस समय भगवान शिव ने संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा करने के लिये स्वयं ही सारा विषपान कर लिया था। विष पीने से #भोलेनाथ का कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ के नाम से पुकारे जाने लगे। पुराणों के अनुसार विषपान के दिन को ही महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाने लगा।*
कई जगहों पर ऐसा भी वर्णन आता है कि #शिव पार्वती का उस दिन #विवाह हुआ था इसलिए भी इस दिन को #शिवरात्रि के रूप में मनाने की परंपरा रही है।*
पुराणों अनुसार ये भी माना जाता है कि #सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन #मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।*
*शिवरात्रि वैसे तो प्रत्येक मास की चतुर्दशी (कृष्ण पक्ष) को होती है परन्तु फाल्गुन (कृष्ण पक्ष) की शिवरात्रि (महाशिवरात्रि) नाम से ही प्रसिद्ध है।
*महाशिवरात्रि से संबधित पौराणिक कथा!!*
एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?
उत्तर में #शिवजी ने पार्वती को 'शिवरात्रि' के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- 'एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था । पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।'*
शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। #चतुर्दशी को उसने #शिवरात्रि व्रत की #कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल-वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।*
पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरी। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और #शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुंची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, 'मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना।' शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई।
*कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, 'हे पारधी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, 'हे पारधी!' मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो।
शिकारी हंसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे। उत्तर में मृगी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान मांग रही हूं। हे पारधी! मेरा विश्वास कर, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं।
मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में बेल-वृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला, हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा।
मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी #रात का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, 'मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें #विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।' उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गया। भगवान शिव की अनुकंपा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।*
*थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार #शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आंसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया। देवलोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहे थे। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प-वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए'।
परंपरा के अनुसार, #इस रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिससे मानव प्रणाली में ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है। इसे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण की सलाह भी दी गयी है ।
शिवरात्रि व्रत की महिमा!!
*इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह #व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है ।*
महाशिवरात्रि व्रत की विधि!!
*इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है. प्रत्येक पहर की पूजा में "ॐ नम: शिवाय" का जप करते रहना चाहिए। #अगर शिव #मंदिर में यह जप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जप किया जा सकता हैं । चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जपों से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपवास की अवधि में #रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी अर्थात् #महाशिवरात्रि पृथ्वी पर #शिवलिंग के #प्राकट्य का दिवस है और प्राकृतिक नियम के अनुसार जीव-शिव के एकत्व में मदद करनेवाले ग्रह-नक्षत्रों के योग का दिवस है । इस दिन रात्रि-जागरण कर ईश्वर की आराधना-उपासना की जाती है ।
‘शिव से तात्पर्य है ‘कल्याणङ्क अर्थात् यह रात्रि बडी कल्याणकारी रात्रि है ।
महाशिवरात्रि का पर्व अपने अहं को मिटाकर लोकेश्वर से मिलने के लिए है । #आत्मकल्याण के लिए पांडवों ने भी शिवरात्रि #महोत्सव का आयोजन किया था, जिसमें सम्मिलित होने के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका से हस्तिनापुर आये थे । जिन्हें संसार से सुख-वैभव लेने की इच्छा होती है वे भी शिवजी की आराधना करते हैं और जिन्हें सद्गति प्राप्त करनी होती है अथवा आत्मकल्याण में रुचि है वे भी शिवजी की आराधना करते हैं ।
शिवपूजा में वस्तु का मूल्य नहीं, भाव का मूल्य है ।* *भावो हि विद्यते देवः ।*
*आराधना का एक तरीका यह है कि उपवास रखकर पुष्प, पंचामृत, बिल्वपत्रादि से चार प्रहर पूजा की जाये । दूसरा तरीका यह है कि #मानसिक पूजा की जाये ।
हम #मन-ही-मन भावना करें :
ज्योतिर्मात्रस्वरूपाय निर्मलज्ञानचक्षुषे । नमः शिवाय शान्ताय ब्रह्मणे लिंगमूर्तये ।।
ज्योतिमात्र (ज्ञानज्योति अर्थात् सच्चिदानंद, साक्षी) जिनका स्वरूप है, निर्मल ज्ञान ही जिनके नेत्र है, जो लिंगस्वरूप ब्रह्म हैं, उन परम शांत कल्याणमय भगवान शिव को नमस्कार है ।
‘ईशान संहिता में भगवान शिव पार्वतीजी से कहते हैं :*
*फाल्गुने कृष्णपक्षस्य या तिथिः स्याच्चतुर्दशी । तस्या या तामसी रात्रि सोच्यते शिवरात्रिका ।।*
*तत्रोपवासं कुर्वाणः प्रसादयति मां ध्रुवम् । न स्नानेन न वस्त्रेण न धूपेन न चार्चया ।*
*तुष्यामि न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासतः ।।
‘फाल्गुन के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को आश्रय करके जिस अंधकारमयी रात्रि का उदय होता है, उसीको ‘शिवरात्रि' कहते हैं । उस दिन जो #उपवास करता है वह निश्चय ही मुझे संतुष्ट करता है । उस दिन उपवास करने पर मैं जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान कराने से तथा वस्त्र, धूप और पुष्प के अर्पण से भी नहीं होता ।
शिवरात्रि व्रत सभी पापों का नाश करनेवाला है और यह योग एवं मोक्ष की प्रधानतावाला व्रत है ।
महाशिवरात्रि बड़ी कल्याणकारी रात्रि है । #इस रात्रि में किये जानेवाले जप, तप और व्रत हजारों गुणा पुण्य प्रदान करते हैं ।
स्कंद पुराण में आता है : ‘शिवरात्रि व्रत परात्पर (सर्वश्रेष्ठ) है, इससे बढकर श्रेष्ठ कुछ नहीं है । जो जीव इस रात्रि में त्रिभुवनपति भगवान महादेव की भक्तिपूर्वक पूजा नहीं करता, वह अवश्य सहस्रों वर्षों तक जन्म-चक्रों में घूमता रहता है ।
यदि आज ‘बं बीजमंत्र का सवा लाख जप किया जाय तो जोड़ों के दर्द एवं वायु-सम्बंधी रोगों में विशेष लाभ होता है ।
व्रत में #श्रद्धा, उपवास एवं प्रार्थना की प्रधानता होती है । व्रत नास्तिक को आस्तिक, भोगी को योगी, स्वार्थी को परमार्थी, कृपण को उदार, अधीर को धीर, असहिष्णु को सहिष्णु बनाता है । #जिनके जीवन में व्रत और नियमनिष्ठा है, उनके जीवन में निखार आ जाता है ।
નવસારી નગરપાલિકાના બજેટ સત્ર ....? સુરક્ષા બાબતેની જોગવાઈ....?
જાએ તો જાયે કહા
નવસારી નગરપાલિકા માં બજેટ સત્ર માં કરોડો રૂપિયાનો ગત વર્ષે ખર્ચ કરવામાં આવ્યો. આજે મોટા ભાગના મોટી મોટી ૫ થી ૧૦ માળની બિલ્ડિગોના માલિક નગરપાલિકા માં ઉચ્ચ હોદ્દો ધરાવે છે. અને બાકીના બિલ્ડરો દર વર્ષે સત્તા પક્ષમાં સામેલ છે .કોઇ ન કોઈ હોદ્દો ધરાવે છે. અને પાર્ટી ફંડ માં કાયદેસર ટકાવારી ગણી ને આપે છે. અને એ બિલ્ડિગો સૌથી મોઘા ભાવે વેચાણ કરવામાં આવે છે. સરકારનો ભાવ અંગે કોઇ અંકુશ નથી. અને સરકાર અંકુશ કરશે પણ નહીં. કારણ કે પાર્ટી ચલાવવા માટે ફંડની જરૂર સૌથી મહત્વ પૂર્ણ છે. આજે કોઈ પણ પાર્ટી હોય..મોટા ભાગના સામાન્ય માં સામાન્ય નગરસેવક બેરોજગાર છે. આજે મોઘવારી માં પોતાના ઘર ચલાવવો મુશ્કેલ છે. સમાજ અને ધર્મ સાથે રહેવા માં દમ નિકળી જાય છે. છતાં દર વર્ષે નવી નવી પોપર્ટી કયાં થી આવે છે. એજ હાલાત આજે મોટા ભાગના અધિકારીઓની પણ છે. આવક કર્તા જાવક માં બધારો સાથે નવી નવી પોપર્ટી ક્યાથી આવે છે. ?સરકારી અધિકારીઓ માટે સરકાર વર્ષ 1971 માં સ્થાવર જંગમ મિલકત માટે કાયદો ઘડી. પરંતુ આજે એની અમલીકરણ કરવા અને કરાવવા માટે કોઈ જવાબદાર અધિકારી નથી એવુ નથી. પરંતુ જવાબદાર અધિકારી હોય કે રાજનેતા દરેકની હાલત સરખી છે. આજે નવસારી જીલ્લા માં દસ દસ માળની બિલ્ડિગો માં આગ લાગે કોઇ પણ અકસ્માત થાય ત્યારે જિલ્લા ખાતે પણ એક મોટો ફાયર ફાઈટર નથી. આજે ૫ મો માળથી ઉપર આગ ઓલવવા માટે એક ફાયર ફાઈટર નવસારી નગરપાલિકા કે 80થી 90 ટકા વસ્તીનો વહીવટી સંચાલન કરનાર જિલ્લા પંચાયત માં પણ નથી. હવે અગમચેતીના પગલા સ્વરૂપે પણ સમાચાર ની ગંભીરતા થી નોધ લઈ તત્કાલ નવસારી જિલ્લા સમાહર્તા શ્રી અને નવસારી જિલ્લા વિકાસ અધિકારી સદર બાબતે તપાસ કરી સરકારના કરોડો રૂપિયાના ફંડ જેમાં મોટા ભાગે તમામ નગરપાલિકાઓ માં બિનજરૂરી કામો કરવામાં આવે છે.ફકત એની તપાસ કાયદેસર તપાસ થાય તો એક એક ફાયર ફાઈટર ઓછા માં ઓછુ દસ માળ સુધી કવર કરે એવા દરેક નગરપાલિકાને આપી શકાય છે. અને નવસારી જીલ્લામાં મોટી મોટી બિલ્ડિગો ના રહેવાસીઓને એક સુરક્ષા પણ આપી શકાય .એટલી રકમ ફકત દંડ પેટે અધિકારીઓ અને ગેરકાયદેસર બિલ્ડરો પાસે મેળવી શકાય છે. નવસારી જિલ્લામાં તમામ નગરપાલિકા ઓના નિયંત્રણ અધિકારી, વહીવટી અધિકારીઓ,પ્રમુખશ્રીઓ, અને ચીફ ઓફીસરશ્રીઓ, નગરસેવકો અને વિરોધપક્ષના નગરસેવકો સાથે તમામ જાગૃત નાગરિકો અને વિદ્વાનો આજે આ સુરક્ષા બાબતે એક થઈ સમાચારની સત્યતા ઉપર જમીની હકીકત માં વિચાર વિમર્શ કરી કાર્યવાહી કરશે જેની આજે અત્યંત જરૂર છે.
નવસારી નગર નિયોજક કચેરી ના પર્દાફાસ -આર .ટી .આઈ.
નવસારી નગર નિયોજક કચેરી ના પર્દાફાસ -આર .ટી .આઈ. નવસારી જિલ્લા માં નગર નિયોજક અને મુલ્યાંકન વિભાગ માં સરકાર શ્રી અને નાગરિકો ના કરોડો રૂપિયા...
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नवसारी जिले में दक्षिण गुजरात वीज कंपनी लिमिटेड का पर्दाफाश -RTI नवसारी जिले में DGVCL कंपनी के लगभग सभी सूचना अधिकारियों ने सूचना अधिकार का...
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નવસારી જિલ્લા પંચાયત માર્ગ અને મકાન માં આરટીઆઈ લકવાગ્રસ્ત નવસારી જિલ્લા પંચાયત માં 75% થી વધુ નાગરિકો રહે છે. અને નવસારી જિલ્...
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(1) હિન્દુધર્મ પ્રમાણે માનવજીવનના સોળ સંસ્કારો :* 1. ગર્ભાધાન સંસ્કાર 2. પુંસવન સંસ્કાર 3.સીમંતોન્ન્યન સંસ્કાર 4. જાતકર્મ સંસ્કાર 5. નામકરણ ...
