Tuesday, May 11, 2021

लोकरक्षक प्रेस में चीफ ब्यूरो के पद पर श्री गोविन्द उपाध्याय और सूरत के मेनेजिंग एडीटर हजरत जाकिर अंसारी जी की नियुक्ति पर नागरिकों में खुशी का माहौल


लोकरक्षक प्रेस में  चीफ ब्यूरो के पद पर श्री गोविन्द उपाध्याय और सूरत के मेनेजिंग एडीटर मो. जाकिर अंसारी जी की नियुक्ति पर नागरिकों में
 खुशी का माहौल  

गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत जिले में आज कायदे-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। शासन प्रशासन आज एक ही लाइन में खड़े होकर गरीबों, आदिवासियों वंचित, आर्थिक पिछड़े , मजदूरों, किसानों, महिलाओं को दो वक्त की रोटी दिलवाने के बजाय अपनी शान शौकत खजाना भरने में रात दिन मेहनत मसक्कत करते नजर आ रहे हैं। शासन प्रशासन आम नागरिकों के बजाय आज सिर्फ और सिर्फ अमीरों के सामने नतमस्तक नजर आ रहा है। संविधान के नियम आज और कानून सिर्फ और सिर्फ फाइलों में आख़िरी श्वास लेने में मजबूर किया गया है। लघुत्तम मासिक वेतन हो या कर्मचारी राज्य बीमा निगम सूरत के अधिकतर अधिकारियों को ही पता नहीं है। मिल रही सूचना के अनुसार श्रम आयुक्त का कार्यालय कहां हैं ज्यादातर समृद्ध नेताओं और जाने माने नागरिकों के मुखिया ओ को भी पता नहीं है। आज पिछले साल से एक सामान्य वायरस से सरकार के सभी बोलबचन की हर पर्त को प्याज की तरह एक एक कर साफ़ कर दिया है। सरकार की सभी आर्थिक नीतियां आज एक जुमला सावित हो रही हैं। राज्य सरकार हो या केन्द्र सरकार आज इस वायरस के सामने अदृश्य हो चुका है। करोड़ों नागरिक आज घरों में भर के माहौल में गिरफ्त नजर आ रहे हैं। भारत जैसे विशालकाय देश और गुजरात जैसे समृद्ध विकसित प्रदेश की शिक्षा सुरक्षा स्वास्थ्य व्यवस्था कहां हैं ढूंढ़ना मुश्किल हो गया है। हालत बद से बद्तर हो चुकी है। 

નવસારી :-નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારી શ્રી આર.આઇ.શેખ સાહેબની કામગીરી કાબીલે તારીફ ...





નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારી શ્રી આર.આઇ.શેખે 
જલાલપોર તાલુકાના
ભિનાર, વેડછા, હાંસાપોર અને એરૂ ગામની મુલાકાત લીધી
નવસારી જિલ્લાના સદર ગામના સરપંચશ્રી અને આગેવાનો સાથે બેઠક યોજી ગામમાં સ્વૈચ્છિક લોકડાઉનના પાલન અને શંકાસ્પદ દર્દીઓની ત્વરિત પ્રાથમિક સારવાર માટે અપીલ કરી
નવસારી/મંગળવારઃ- નવસારી જિલ્લાના જલાલપોર તાલુકાના ભિનાર, વેડછા, હાંસાપોર અને એરૂ ગામની નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારીશ્રી આર.આઇ.શેખે રૂબરૂ મુલાકાત લીધી હતી. કોરોના વાયરસના સંક્રમણથી વધુ પ્રભાવિત ન થાય ગામો માટે આગેવાનો સાથે બેઠક યોજી નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારી શ્રીએ ગામમાં સ્વૈચ્છિક લોકડાઉન સહિતની બાબતો અંગે ચર્ચા કરી હતી.
શ્રી આર.આઇ.શેખે જણાવ્યું હતું કે, ગામમાં જો કોરોના વાયરસનું સંક્રમણ અટકાવવું હશે તો સ્વૈચ્છિક લોકડાઉન અતિ આવશ્યક છે. આગેવાનો દ્વારા લોકોને અપીલ કરવામાં આવે કે ગ્રામજનો ખૂબ જ અગત્યના કામ વગર ઘરની બહાર ન નીકળે અને માસ્કનો ફરજીયાત ઉપયોગ કરે તો આપણે ગામને અવશ્ય કોરોના મુક્ત કરી શકીશું.

વધુમાં શ્રી શેખે જણાવ્યું હતું કે, જેને પણ શરદી, તાવ કે કળતર જેવા હળવા લક્ષણો જણાય તેમણે પહેલા જ દિવસથી આરોગ્ય વિભાગ દ્વારા પ્રાથમિક સારવાર માટે આપવામાં આવતી દવાઓનો ઉપયોગ શરૂ કરી દેવો જોઈએ અને સેલ્ફ આઈસોલેશનનું પાલન કરવું જોઈએ. જેનાથી શરૂઆતથી જ તેના પર કાબુ મેળવી શકાય અને દર્દીને હોસ્પિટલમાં દાખલ કરવાની જરૂરિયાત ઉભી ન થાય.
કોરોના વાયરસથી સંક્રમિત થયા હોય અને નાના ઘર કે સંયુક્ત કુટુંબમાં રહેતા હોય તેવા ગ્રામજનો ઘરના સભ્યોને સંક્રમિત ન કરે તે માટે પ્રાથમિક આરોગ્ય કેન્દ્ર પર શરૂ કરવામાં આવેલા કોવિડ કેર સેન્ટરમાં દાખલ થાય તે માટે પણ નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારીશ્રી શેખે ખાસ અનુરોધ કર્યો હતો. સાથે જ ગ્રામ્ય કક્ષાએ કાર્યરત આરોગ્યકર્મી અને અન્ય કર્મચારીઓને જરૂરી માર્ગદર્શન પણ આપ્યું હતું.
આરોગ્ય વિભાગ દ્વારા જિલ્લા વહિવટી તંત્રના સંકલનમાં સઘન સર્વેલન્સની કામગીરી કરવામાં આવી રહી છે. ગામોમાં લોકજાગૃતિ કેળવાય તથા સંક્રમણ અટકાવવા સઘન પ્રયત્નો થાય તે માટે નાયબ જિલ્લા વિકાસ અધિકારીશ્રી શેખે સરપંચશ્રીઓ અને સ્થાનિક આગેવાનો સાથે બેઠક યોજી વહિવટી તંત્રને સહકાર આપવા ઉપરાંત સ્વયંશિસ્તના પાલન થકી ગામને કોરોનામુક્ત કરવા માર્ગદર્શન અને પ્રેરણા આપી હતી.

Monday, May 10, 2021

ગુજરાત રાજ્ય માટે દુર્ભાગ્યપૂર્ણ અને શરમજનક સમાચાર





નવસારી જિલ્લામાં આજે આંબા વાડી માં સારવાર કરવા તબીબો મજબૂર થયા છે.એક સામાન્ય હોસ્પિટલ નથી. અને સરકારના પરિપત્ર મુજબ નવસારી જિલ્લા પંચાયત માં દર મહિને ફક્ત દરેક કચેરી નો ગેરકાયદેસર એસી બંધ કરીએ ત્યારે દર મહિને એ ખર્ચે થી કેટલાક નાગરિકો ની સારવાર કરી જાન બચાવી શકીએ. અને આજે નવસારી જિલ્લા પંચાયત ના સર્વોચ્ચ અધિકારીઓ દરેક વિભાગ ના એ સમાચાર વાંચીને ખુશ થશે કે પોતાના કચેરી થી ગેરકાયદેસર એસી બંઘ કરશે એ જોવા માટે એક ટીમ ની રચના કરવામાં આવી છે. બિન જરૂરી હિસાબી અધિકારી દરેક મુદ્દે હાઈકોર્ટ અને સુપ્રીમ કોર્ટે નો અહેવાલ દાખલા આપે છે. આજે બિનજરૂરી ગેરકાયદેસર સુવિધાઓ જેને સરકાર નથી આપી આજે પોતાની ફરજ સંબંધિત તમામ અધિકારીઓ બજાવશે ખરા....

Sunday, May 9, 2021

परम वीर भारत के सपूत महाराणा प्रताप की जन्म जयंती विजलपोर में क्षत्रिय समाज द्वारा संपन्न








महाराणा प्रताप की कहानी और शुभकामना संदेश ....


महाराणा प्रताप की कहानी 
और शुभकामना संदेश 

महाराणा प्रताप को राजपूत वीरता, शिष्टता और दृढ़ता की एक मिसाल माना जाता है। दुशमनों के सामने सिर्फ महाराणा प्रताप का नाम लेने भर से सेना के पसीने छूट जाते थे। एक ऐसा राजा जो विषम से विषम परिस्थिति में किसी के आगे झुका नहीं। महाराणा प्रताप को जितना उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है, उतनी ही उनकी दरियादिली और प्रजा व राज्य से उनका प्रेम जगजाहिर है। बताते हैं कि प्रताप कभी भी निहत्थे दुश्मन के लिए भी एक तलवार रखते थे। महाराणा प्रताप पर बहुत सी फिल्में और धारावाहिक बनें। कई शोध हुए और उनपर किताबें भी लिखी गई। आज भी प्रताप की गौरवगाथा बच्चों को पढ़ाई जाती है। ताकि उनकी भी रगों में महाराणा प्रताप की तरह देशभक्ति और बहादुरी का प्रवाह बना रहे। आइए नजर डालते हैं भारत का वीर पुत्र कहा जाने वाले महाराणा प्रताप के इतिहास, जीवन परिचय, युद्ध, उनके विचारों और उनकी शौर्य से जुड़े कुछ किस्से कहानियों पर  -
महाराणा प्रताप कौन थे-

महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान हिंदू शासक थे। वे उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। वे अकेले ऐसे वीर थे, जिसने मुग़ल बादशाह अकबर की अधीनता किसी भी प्रकार स्वीकार नहीं की। वे हिन्दू कुल के गौरव को सुरक्षित रखने में सदा तल्लीन रहे। वीरता और आजादी के लिए प्यार तो राणा के खून में समाया था क्योंकि वह राणा सांगा के पोते और उदय सिंह के पुत्र थे। राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास का सबसे चर्चित युद्ध हल्दीघाटी का युद्ध था जो मुगल बादशाह अकबर और महराणा प्रताप के बीच हुआ था। अकबर और महाराणा प्रताप की शत्रुता जगजाहिर थी। लेकिन इसके बावजूद जब अकबर को महाराणा प्रताप की मृत्यु की खबर मिली तो वो बिल्कुल मौन हो गया था और उसकी आँखों मे आंसू आ गए थे। वह महाराणा प्रताप के गुणों की दिल से प्रशंसा करता था।
महाराणा प्रताप जयंती -

महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी संवत कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। प्रताप की जयंती के मौके पर देशभर में विभिन्न  तरहे के आयोजन किये जाते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पण की जाती है। वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजी वर्ष के अनुसार प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था, इसीलिए उस दिन हिन्दू वर्ष के अनुसार ज्येष्ठ मास की तृतीया तिथि थी, इसीलिए बहुत सी जगह 9 मई को उनकी जयंती मनाई जाती है। 

महाराणा प्रताप जयंती शुभकामना संदेश 

महाराणा प्रताप ऐसे शूरवीर थे जो अपनी मातृभूमि की रक्षा और आजादी के लिए पूरे जीवन लड़ते रहे। उन्होंने अपने जीवन में तमाम कष्ट सहन करते हुए भी पूरे देश के सामने स्वतंत्रता, स्वाभिमान और एक सच्चे देशभक्त की मिसाल पेश की और भारत की धरती को गौरवान्वित किया।
 महाराणा प्रताप की जयंती पर शुभकामना संदेश 
 अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें और साथ ही सोशल मीडिया पर भी शेयर करें। इससे हम सभी को जीवन में आगे बढ़ने और सच्चाई की राह पर चलने की प्रेरणा मिलती रहे  -
- महाराणा प्रताप की कर्म से धरती-नभ महिमा मंडित है,
इनकी आन-बान-शान की गरिमा का यशगान अभी तक गुंजित है। जय हो महराणा प्रताप जी की ...
- हर मां कि ये ख्वाहिश है, कि एक प्रताप वो भी पैदा करे। 
देख के उसकी शक्ती को, हर दुशमन उससे डरा करे। महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ...
- करता हूं नमन मैं प्रताप को, जो वीरता का प्रतीक हैं।
तू लौह-पुरुष, तू मातृ-भक्त, तू अखण्डता का प्रतीक है। महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं ...
- था साथी तेरा घोड़ा चेतक, जिस पर तू सवारी करता था।
थी तुझमे कोई खास बात, कि अकबर तुझसे डरता था। धन्य हैं महाराणा प्रताप ...
- जब-जब तेरी तलवार उठी, तो दुश्मन टोली डोल गई। 
फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तुने हुंकार भरी। 

महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं 

- फीका पड़ा था तेज सूरज का, जब माथा ऊंचा तू करता था।
फीकी हुई बिजली की चमक, जब-जब आंख खोली प्रताप ने..
- है धर्म हर हिन्दुस्तानी का तेरे जैसा बनने का। 
चलना है अब तो उसी मार्ग, जो मार्ग दिखाया प्रताप ने। 
महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं ...
- पूत तो सभी होते हैं पर
महाराणा प्रताप जैसे सपूत नहीं होते। 
आप सभी को महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं ...
- धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने।
धन्य हुआ रे सारा मेवाड़, जहां कदम रखे थे प्रताप ने।
- प्रताप का सिर कभी झुका नहीं
इस बात से अकबर भी शर्मिंदा था
मुगल कभी चैन से सो ना सके
जब तक मेवाड़ी राणा जिंदा था। महाराणा प्रताप की जयंती पर शत-शत नमन ...
- राणा प्रेरणा की मिसाल बन गये,
दुश्मनों से ऐसे लड़े कि महान बन गये। 
महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ....
- जय महाराणा प्रताप, जय मेवाड़, जय एकलिंग जी…
महाराणा प्रताप का इतिहास -
महाराणा प्रताप  को बचपन में ही ढाल तलवार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा क्योंकि उनके पिता उन्हें अपनी तरह कुशल योद्धा बनाना चाहते थे। बालक प्रताप ने कम उम्र में ही अपने अदम्य साहस का परिचय दे दिया था। धीरे धीरे समय बीतता गया। दिन महीनों में और महीने सालों में परिवर्तित होते गये। इसी बीच प्रताप अस्त्र शस्त्र चलाने में निपुण हो गये। जब महाराणा प्रताप (महाराणा प्रताप की कहानी) को अपने पिता के सिंहासन पर बैठाया गया, तो उनके भाई जगमाल सिंह, ने बदला लेने के लिए मुगल सेना में शामिल हो कर बगावत कर दिया। मुगल राजा अकबर ने उसके द्वारा प्रदान की गई जानकारी और सहायता के कारण उसे जहज़पुर शहर की सल्तनत पुरस्कार के रूप में दिया। जब राजपूतों ने चित्तौड़ को छोड़ दिया, तो मुगलों ने जगह पर नियंत्रण कर लिया, लेकिन मेवाड़ राज्य को वह अपने अधीन करने के उनके प्रयास असफल रहे। अकबर द्वारा कई दूत भेजे गए थे जिन्होंने एक गठबंधन पर प्रताप के साथ बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन कुछ काम नहीं आया। 1573 में छह दूत संधि करने के लिए अकबर द्वारा भेजे गए लेकिन महाराणा प्रताप  द्वारा सब ठुकरा दिए गए। इन अभियानों में से अंतिम का नेतृत्व अकबर के बहनोई राजा मान सिंह ने किया था। जब शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के प्रयास विफल हो गए, तो अकबर ने अपनी शक्तिशाली मुगल सेना के साथ लड़ने की कोशिश करने का मन बना लिया। 
अकबर की सेना में 80000 सैनिक थे वही महाराणा प्रताप की राजपूत सेना संख्या में सिर्फ 20000 थी। यह युद्ध भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण युद्ध था। इतिहासकारों के अनुसार इस युद्ध मे न तो कोई विजय हुआ, न ही किसी की पराजय हुई। क्योंकि अकबर की सेना बहुत विशाल थी. उसके सामने 20000 की सेना थी, इसके बाबजूद वो महाराणा प्रताप को बंदी नही बना पाए थे। हार के बाबजूद भी महाराणा प्रताप ने अपना मनोबल कमजोर नहीं होने दिया और आखिरकार अपने खोये हुए क्षेत्रो को पुनः प्राप्त किया।
महाराणा प्रताप की कहानी

यूं तो महारणा प्रताप (महाराणा प्रताप की कहानी) के जीवन ऐसे कई किस्से हैं जो आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। लेकिन उनमें से ये प्रताप की ये तीन कहानियां बेहद प्रसिद्ध हैं -
1. भाग खड़ी हुई अकबर की सेना -

महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ के किले में हुआ था। ये किला दुनिया की सबसे पुरानी पहाड़ियों की रेंज अरावली की एक पहाड़ी पर है। महाराणा का पालन-पोषण भीलों की कूका जाति ने किया था। भील राणा से बहुत प्यार करते थे। वे ही राणा के आंख-कान थे। जब अकबर की सेना ने कुम्भलगढ़ को घेर लिया तो भीलों ने जमकर लड़ाई की और तीन महीने तक अकबर की सेना को रोके रखा। एक दुर्घटना के चलते किले के पानी का स्त्रोत गन्दा हो गया। जिसके बाद कुछ दिन के लिए महाराणा को किला छोड़ना पड़ा और अकबर की सेना का वहां कब्ज़ा हो गया। लेकिन अकबर की सेना ज्यादा दिन वहां टिक न सकी और फिर से कुम्भलगढ़ पर महाराणा का अधिकार हो गया। 
2. महाराणा प्रताप का हाथी -

महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन उनका एक हाथी भी था। उसका नाम था रामप्रसाद। उस हाथी का उल्लेख अल- बदायुनी ने जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ा था उसने अपने एक ग्रन्थ में किया है। वो लिखता है की जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढ़ाई की थी तब उसने दो चीजों को ही बंदी बनाने की मांग की थी एक तो खुद महाराण और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद। वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था। उस हाथी को पकड़ने के लिए अकबर की सेना ने 7 बड़े हाथियों का एक चक्रव्यू बनाया और उन पर 14 महावतों को बिठाया तब कहीं जाके उसे बंदी बना पाये। उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश  कि या गया जहां अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा। रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया। पर उस स्वामिभक्त हाथी ने 18 दिन तक मुगलों का न ही दाना खाया और ना ही पानी पीया और वो शहीद हो गया। तब अकबर ने कहा था कि;- जिसके हाथी को मैं मेरे सामने नहीं झुका पाया उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाऊंगा।
3. चेतक का पराक्रम -

हल्दीघाटी के युद्ध में बिना किसी सैनिक के राणा अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो कर पहाड़ की ओर चल पडे़। उनके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने अपना पराक्रम दिखाते हुए रास्ते में एक पहाड़ी बहते हुए नाले को लांघ कर प्रताप को बचाया जिसे मुग़ल सैनिक पार नहीं कर सके। चेतक द्वारा लगायी गयी यह छलांग इतिहास में अमर हो गयी इस छलांग को विश्व इतिहास में नायब माना जाता है। चेतक ने नाला तो लांघ लिया, पर अब उसकी गति धीरे-धीरे कम होती जा रही थी पीछे से मुग़लों के घोड़ों की टापें भी सुनाई पड़ रही थी उसी समय प्रताप को अपनी मातृभाषा में आवाज़ सुनाई पड़ी, ‘नीला घोड़ा रा असवार’ प्रताप ने पीछे पलटकर देखा तो उन्हें एक ही अश्वारोही दिखाई पड़ा और वह था, उनका सगा भाई शक्तिसिंह। प्रताप के साथ व्यक्तिगत मतभेद ने उसे देशद्रोही बनाकर अकबर का सेवक बना दिया था और युद्धस्थल पर वह मुग़ल पक्ष की तरफ़ से लड़ता था। जब उसने नीले घोड़े को बिना किसी सेवक के पहाड़ की तरफ़ जाते हुए देखा तो वह भी चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा, परन्तु केवल दोनों मुग़लों को यमलोक पहुंचाने के लिए। जीवन में पहली बार दोनों भाई प्रेम के साथ गले मिले थे। इस बीच चेतक इमली के एक पेड़ के पास गिर पड़ा, यहीं से शक्तिसिंह ने प्रताप को अपने घोड़े पर भेजा और वे खुद चेतक के पास रुके रहे। कहते हैं यही चेतक ने अपने प्राण त्याग दिये। चेतक लंगड़ा (खोड़ा) हो गया, इसीलिए पेड़ का नाम भी खोड़ी इमली हो गया। कहते हैं, इमली के पेड़ का यह ठूंठ आज भी हल्दीघाटी में उपस्थित है।
महाराणा प्रताप का युद्ध -

महाराणा प्रताप ने जीवनभर मुगलों  से लड़ाई लड़ी। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद भी अगले 10 सालों में मेवाड़ में महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखी। वास्तविकता में हल्दीघाटी का युद्ध, महाराणा प्रताप और मुगलों के बीच हुए कई युद्धों की शुरुआत भर था। 1576 में हुए हल्दीघाटी युद्ध के बाद भी अकबर ने महाराणा को पकड़ने या मारने के लिए 1577 से 1582 के बीच करीब एक लाख सैन्यबल भेजे। अंगेजी इतिहासकारों ने लिखा है कि हल्दीघाटी युद्ध (हल्दीघाटी युद्ध का इतिहास) का दूसरा भाग जिसको उन्होंने 'बैटल ऑफ दिवेर' कहा है, मुगल बादशाह के लिए एक करारी हार सिद्ध हुआ था। हल्दीघाटी के बाद अक्टूबर 1582 में दिवेर का युद्ध हुआ। इस युद्ध में मुगल सेना की अगुवाई करने वाला अकबर का चाचा सुल्तान खां था। दिवेर के युद्ध के बाद प्रताप ने गोगुंदा, कुम्भलगढ़, बस्सी, चावंड, जावर, मदारिया, मोही, माण्डलगढ़ जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद महाराणा प्रताप व मुगलो के बीच एक लम्बा संघर्ष युद्ध के रुप में घटित हुआ, जिसके कारण कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को "मेवाड़ का मैराथन" कहा।
मेवाड़ का इतिहास -

मेवाड़ राजस्थान के दक्षिण-मध्य में स्थित एक रियासत हुआ करती थी। इस समय आधुनिक भारत में उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमंद, तथा चित्तौडगढ़ जिले हैं। सैकड़ों सालों तक यहां राजपूतों का शासन रहा और इस पर गहलौत तथा सिसोदिया राजाओं ने 1200 साल तक राज किया। कहा जाता है मेवाड़ शासकों का राजतिलक भील जाति के सरदार अपने अंगूठे के रक्त से करते थे।  1550 के आसपास मेवाड़ की राजधानी थी चित्तौड़। महाराणा प्रताप सिंह यहीं के राजा थे। चित्तौड़गढ़ 1568 तक मेवाड़ की राजधानी के रूप में देखा गया था उसके बाद उदयपुर को मेवाड़ की राजधानी बना दिया गया। ऐसा माना गया है की इसकी स्थापना सिसोदिया वंश के शासक बप्पा रावल ने की थी। चित्तौड़गढ़ पर कई बार आक्रमण किये गये। जब भी चित्तौड़गढ़ का राजा युद्ध में परास्त हुआ है तब-तब वहां की वीरांगनाओ ने जौहर का रास्ता चुन अपनी आन-बान-शान की रक्षा की है। सबसे पहले जब 1303 अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था तब राणा रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मावती ने युद्ध में अपने पति की जान चली जाने के कारण जौहर किया था। उसके बाद 1537 में रानी कर्णावती ने जौहर किया था। चित्तौड़गढ़ एक ऐसी वीरभूमि है, जो पुरे भारत में शौर्य, बलिदान और देशभक्ति का एक गौरवपूर्ण उदाहरण है। यहां पर अनगिनत राजपूत वीरों ने अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपने खून से नहाये हैं।
वीरों की इस भूमि में राजपूतों के छोटे-बड़े अनेक राज्य रहे जिन्होंने भारत की स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। इन्हीं राज्यों में मेवाड़ का अपना एक विशिष्ट स्थान है जिसमें इतिहास के गौरव बप्पा रावल, खुमाण प्रथम महाराणा हम्मीर, महाराणा कुम्भा, महाराणा सांगा, उदयसिंह और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने जन्म लिया है। अकबर की भारत विजय में केवल मेवाड़ के महाराणा प्रताप (महाराणा प्रताप की कहानी) बाधक बना रहे। अकबर ने सन् 1576 से 1586 तक पूरी शक्ति के साथ मेवाड़ पर कई आक्रमण किए, पर उसका राणा प्रताप को अधीन करने का मनोरथ सिद्ध नहीं हुआ। महाराणा प्रताप की मृत्यु पर उसके उत्तराधिकारी अमर सिंह ने मुगल सम्राट जहांगीर से संधि कर ली। इस तरह 100 साल बाद मेवाड़ की स्वतंत्रता का भी अंत हो गया। बाद में यह अंग्रेज़ों द्वारा शासित राज्य भी बना।
हल्दीघाटी का युद्ध - 

हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था। यह हल्दी घाटी में लड़ा गया, इसलिए इसे हल्दीघाटी का युद्व कहते है। इतिहासकारों का मानना है कि यह कोई आम युद्ध नहीं था, बल्कि अकबर और महाराणा के बीच लड़ा गया यह युद्ध महाभारत के युद्ध की तरह विनाशकारी था। 18 जून, 1576 को हल्दीघाटी के मैदान में मुगलों की तरफ से आसफ खान और राजपूतों की तरफ से मान सिंह के नेतृत्व में दोनों सेना आमने-सामने खड़ी हुई।  इस युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे जबकि मुगलों के पास 85000 सैनिक। इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। हल्दीघाटी की लड़ाई चार घंटे तक चली और इस लड़ाई में मेवाड़ के लगभग 1600 सैनिक मारे गए जबकि मुगलों ने अपने सिर्फ 150 सैनिकों को खो दिया और 350 सैनिक घायल हो गए। महाराणा प्रताप बुरी तरह से घायल हो गए लेकिन भागकर पास की पहाड़ियों में छिप गए। मुगलों ने अरावली को छोड़कर मेवाड़ के कई हिस्सों पर अपना कब्जा कर लिया। लेकिन वो महाराणा प्रताप को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सके। उसके बाद जंगलों में रहकर महाराण प्रताप ने अपनी गुरिल्ला रणनीति के माध्यम से मुगलों को परेशान करना जारी रखा। 
जंगलों में रहने के दौरान उनके पास खाने के लिए कुछ नही था तो वो घांस की रोटियां खाया करते थे। वो हर विषम परिस्थितियों को झेलते हुए अपनी सेना तैयार करते रहे। जब कुछ समय बाद अकबर का ध्यान चित्तौड़ से हट गया और वो लाहौर की तरफ बढ़ गया क्योंकि उसे अपने उत्तर-पश्चिम वाले क्षेत्र पर भी नजर रखना था। इसी का फायदा उठाकर महाराणा प्रताप ने पश्चिमी मेवाड़ पर अपना कब्जा कर लिया जिसमें कुंभलगढ़, उदयपुर और गोकुंडा आदि शामिल थे और उन्होंने चवण को अपनी नई राजधानी बनाई। ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे। मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी। दोनों ओर से बराबरी की टक्कर के चलते युद्ध का कोई परिणाम हासिल ना हो सका था।

चेतक की वीरता -

जब-जब महाराणा प्रताप का नाम लिया जाता है तब-तब उनके प्रिय घोड़े चेतक का नाम भी लिया जाता है। आज भी मेवाड़ में कहा जाता है कि 'बाज नहीं, खगराज नहीं, पर आसमान में उड़ता था। इसीलिए नाम पड़ा चेतक।' स्वामिभक्ति ऐसी कि दुनिया में वह सर्वश्रेष्ठ अश्व माना गया। महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक इतना शौर्यवान था कि दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए उसके सिर पर हाथी की सूंड लगाई जाती थी। महाराणा प्रताप का प्रसिद्ध नीलवर्ण घोड़ा चेतक उनका अत्यंत प्रिय घोड़ा था। उसके चर्चे पूरे देश में थे। दरअसल, महाराणा प्रताप के पास एक अरब व्यापारी अरबी नस्ल के तीन घोड़े लेकर आया था, जिनके नाम चेतक, त्राटक एवं अटक थे। प्रताप ने घोड़ो का परिक्षण किया जिसमे चेतक और त्राटक सफल हुए। लेकिन महाराणा ने चेतक को अपने पास रख लिया और त्राटक को छोटे भाई शक्ति सिंह को दे दिया। 
चेतक ने हल्दीघाटी (1576) के युद्ध में अपने शौर्य और पराक्रम द्वारा अपने स्वामिभक्त होने का परिचय दिया था। उस युद्ध मे अकबर की न तो जीत हुई न ही महाराणा प्रताप की हार हुई। लेकिन युद्ध के दौरान प्रताप घायल हो गए थे और मुगल उन्हें बंदी बनाना चाहते थे। लेकिन चेतक ने बहादुरी दिखाते हुए अपने स्वामी महाराणा प्रताप  को वहां से निकाल 26 फिट का एक दरिया पार कर अंत में वीरगति को प्राप्त हो गया। युद्ध के स्थान पर हल्दीघाटी में आज भी चेतक की समाधि बनी हुई है, जहां महाराणा प्रताप ने छोटे भाई शक्ति सिंह के साथ में चेतक का दाह-संस्कार किया था। चेतक के नाम पर एक मंदिर भी बना है। हल्दीघाटी काव्य में श्याम नारायण पांडेय ने महाराणा प्रताप  प्राण प्रिय घोड़े चेतक को लेकर भी कुछ पंक्तियां लिखीं हैं जो कुछ इस प्रकार है -
''चें तक अरि ने बोल दिया, चेतक के भीषण वारों से। कभी न डरता था दुश्मन की लहू भरी तलवारों से। चेत करो, अब चेत करो, चेतक की टाप सुनाई दी। भागो, भागो, भाग चलो, भाले की नोंक दिखाई दी। चेतक क्या बड़वानल है वह, उर की आग जला दी है। विजय उसी के साथ रहेगी, ऐसी बात चला दी है।''
महाराणा प्रताप का भाला - 

सोलहवीं शताब्दी के राजपूत शासकों में महाराणा प्रताप ऐसे शासक थे, जो अकबर को लगातार टक्कर देते रहे। उस समय के जानकार बताते हैं कि स्वयं प्रताप का वजन 110 किलो और कद 7 फीट 5 इंच थी। वो बेहद फुर्तिले और सहासी थे। महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था। इतने भार को लेकर वह चेतक पर हवा की गति से रण भूमि में चलते थे। महाराणा प्रताप के हथियार इतिहास के सबसे भारी युद्ध हथियारों में शामिल हैं। महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान आज भी उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
महाराणा प्रताप की जीवनी -

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 ईसा पूर्व राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। उनके पिता महाराजा उदयसिंह और माता राणी जीवत कंवर थीं। वे राणा सांगा के पौत्र थे। महाराणा प्रताप को बचपन में सभी 'कीका' नाम लेकर पुकारा करते थे। पिता उदयसिंह की मृत्यु के बाद राजपूत सरदारों ने मिलकर साल 1576 को महाराणा प्रताप (महाराणा प्रताप की कहानी) को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाया। मेवाड़ को जीतने के लिए अकबर ने कई प्रयास किए। अकबर चाहता था कि महाराणा प्रताप अन्य राजाओं की तरह उसके कदमों में झुक जाए। महाराणा प्रताप ने भी अकबर की अधीनता को स्वीकार नहीं किया था। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थीं। कहा जाता है कि उन्होंने ये सभी शादियां राजनैतिक कारणों से की थीं। महाराणा प्रताप के 17 बेटे और 5 बेटियां थीं। महारानी अजबदे (महाराणा प्रताप की पत्नी का नाम) से पैदा हुए अमर सिंह उनके उत्तराधिकारी बने। नीचे दिये गये चार्ट के माध्यम से जाने महाराणा प्रताप का जीवन परिचय -

 नाम महाराणा प्रताप
 उपनाम प्रताप सिंह
 धर्म हिन्दू
 जन्मतिथि 9 मई 1540
 जन्म स्थान कुम्भलगढ़ दुर्ग  राजस्थान, भारत
 पिता उदय सिंह
 माता महारानी जयवंताबाई
 पत्नी महारानी अजबदे पंवार
 उत्ताधिकारी अमर सिंह प्रथम
 मृत्यु 19 जनवरी 1597 (उम्र 56)
 शासन काल 1568-1597

महाराणा प्रताप के अनमोल विचार - 

महाराणा प्रताप अकेले ऐसे राजपूत राजा थे जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ़ता के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने अपने कार्यों और विचारों से लोगों में हमेशा उत्साह, स्वाभिमान, रक्षक और देशप्रेम की भावना जागृत की। पढ़िए ऐसे वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप के अनमोल विचार जिन्हें आप अपने जीवन में शामिल कर खुद को निर्भय होकर परेशानियों का सामना करने में सक्षम बना सकते हैं -
- ये संसार कर्मवीरो की ही सुनता है। अतः अपने कर्म के मार्ग पर अडिग और प्रशस्त रहो। - महाराणा प्रताप
- जो अत्यंत विकट परिस्तिथत मे भी झुक कर हार नही मानते। वो हार कर भी जीते होते है। - महाराणा प्रताप
- अपने और अपने परिवार के अलावा जो अपने राष्ट्र के बारे में सोचे वही सच्चा नागरिक होता है। - महाराणा प्रताप
- मातृभूमि और अपने मां मे तुलना करना और अंतर समझना निर्बल और मुर्खो का काम है। - महाराणा प्रताप
- तब तक परिश्रम करते रहो जब तक तुम्हे तुम्हारी मंजिल न मिल जाये। - महाराणा प्रताप
- अगर इरादा नेक और मजबूत है तो मनुष्य कि पराजय नहीं विजय ही होती है। - महाराणा प्रताप
- जो सुख मे अतिप्रसन्न और विपत्ति मे डर के झुक जाते है, उन्हें ना सफलता मिलती है और न ही इतिहास में जगह। - महाराणा प्रताप
- अपनी कीमती जीवन को सुख और आराम कि जिन्दगी बनाकर कर नष्ट करने से बढ़िया है कि अपने राष्ट्र कि सेवा करो। - महाराणा प्रताप
- अगर सर्प से प्रेम रखोगे तो भी वो अपने स्वभाव के अनुसार डसेगा ही। - महाराणा प्रताप
- अन्याय, अधर्म,आदि का विनाश करना पूरे मानव जाति का कतर्व्य है। - महाराणा प्रताप
- समय इतना बलवान होता है, कि एक राजा को भी घास की रोटी खिला सकता है।  -  महाराणा प्रताप
- सम्मानहीन मनुष्य एक मृत व्यक्ति के ही समान होता है।  - महाराणा प्रताप
- शत्रु सफल और शौर्यवान व्यक्तित्व के ही होते है। - महाराणा प्रताप
- अपने अच्छे समय में अपने कर्म से इतने विश्वास पात्र बना लो कि बुरा वक्त आने पर वो उसे भी अच्छा बना दें … - महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप से जुड़े सवाल-जवाब 

महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई?

मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत 1585 ई. में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए,परंतु दुर्भाग्य से उसके ग्यारह वर्ष के बाद ही 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी चावंड में उनकी मृत्यु हो गई। ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि उनकी मृत्यु कैसे हुई थी। लेकिन जानकारों का कहना है कि वो शिकार करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गये थे और जिससे उनकी मौत हो गई।
वर्तमान में महाराणा प्रताप के वंशज कौन हैं और कहां रहते हैं?
वर्तमान में श्री अरविंद सिंह मेवाड़ और महाराणा महेंद्र सिंह इस वंश के उत्तराधिकारी है। सांकेतिक रूप से वे महाराणा है। उदयपुर के महाराणाओं को श्री एकलिंगजी की ओर से शासक नहीं बल्कि राज्य का संरक्षक माना जाता है। महराणा प्रताप के वंशज आज भी उदयपुर में रहते है। उनका सिसोदिया वंश उदयपुर में सिटी पैलेस में रहता है।
महाराणा प्रताप की जयंती की दो तारीखें क्यों हैं?
महाराणा प्रताप  का जन्म अंग्रेजी वर्ष के अनुसार 9 मई 1540 को हुआ था ,उस दिन हिन्दू वर्ष के अनुसार ज्येष्ठ मास की तृतीया तिथि थी ,इसलिए कुछ लोग अंग्रेजी वर्ष के आधार पर 9 मई को मनाते है। लेकिन राजपूत समाज उनका जन्मदिवस पंचाग तिथि के अनुसार मनाता है। जोकि साल 2021 में 25 मई को है। इसीलिए उनकी जयंती की दो तारीखें हैं।
महाराणा प्रताप के घोड़े का क्या नाम था ?
महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम 'चेतक' था। वो उनके सबसे प्रिय और प्रसिद्ध नीलवर्ण ईरानी मूल का घोड़ा था।

Saturday, May 8, 2021

કોરોના મહામારી થી રાહત... સાથે ગુજરાત રાજ્ય માં સૌથી વધુ એક લાખ બેડ



રાજ્ય સરકાર દ્વારા યુદ્ધના ધોરણે છેલ્લા માસમાં કોરોના બેડની સંખ્યા ૪૧,૦૦૦થી વધારીને ૧ લાખ કરાઇ
મુખ્યમંત્રીશ્રી રૂપાણી

આજે ગુજરાત રાજ્ય માં કોરોનાની ગતિ થી રાહત સાથે સરકારની પ્રાથમિક તબક્કે
તમામના પરિશ્રમના પરિણામે છેલ્લા ૧૦ દિવસથી ગુજરાતમાં કોરોના કેસ સ્ટેબલ જોવા મળી રહ્યો છે.
• ગઈકાલે ૧૨,૫૦૦ નવા કેસ સામે ૧૩,૮૦૦ દર્દી સાજા થઈને ઘરે ગયા
• રાજ્યમાં ૫૮,૦૦૦ ઓક્સિજન બેડ અને ૨,૦૦૦ જેટલી હોસ્પિટલમાં ૧૧૦૦ ટન ઓક્સિજનનો ૨૪ કલાક અવિરત સપ્લાય
• છેલ્લા એક માસમાં ૭ લાખથી વધુ રેમડેસિવિર ઇન્જેક્શન ઉપલબ્ધ કરાવાયા
• રાજ્ય સરકારના સઘન પગલાં તેમજ લોકોનો સહકાર- જાગૃતિથી કોરોનાની બીજી લહેરમાંથી બહાર આવતું ગુજરાત


વડોદરા ખાતેના “આત્મીય પોઝિટિવ કેર”- પોસ્ટ કોવિડ સેન્ટરનો
ગાંધીનગરથી વર્ચ્યુઅલ પ્રારંભ કરાવતાં મુખ્યમંત્રીશ્રી વિજય રૂપાણી

છેલ્લા ૧૦ દિવસથી ગુજરાતમાં કોરોનાના કેસ સ્ટેબલ થયા છે. ગઈકાલે ગુજરાતમાં ૧૨,૫૦૦ નવા કેસ સામે ૧૩,૮૦૦ દર્દી સાજા થઈને પોતાના ઘરે ગયા છે જે આપણા સૌ માટે ખૂબ જ રાહતના સમાચાર છે. કોરોનાની બીજી લહેરમાં રાજ્ય સરકારે યુદ્ધના ધોરણે છેલ્લા મહિનામાં બેડની સંખ્યા ૪૧ હજારથી વધારીને ૧ લાખ કરવામાં આવી છે. રાજ્ય સરકારના સઘન પગલાં તેમજ કોરોના વોરિયર્સની દિવસ- રાત મહેનત અને લોકોના સહકાર- જાગૃતિના પરિણામે ગુજરાત કોરોનાની બીજી લહેરમાં પણ ધીમે ધીમે મક્કમતાથી બહાર આવી રહ્યું છે તેમ મુખ્યમંત્રીશ્રી વિજય રૂપાણીએ આજે ગાંધીનગરથી જણાવ્યું હતું.


મુખ્યમંત્રીશ્રી વિજય રૂપાણીના હસ્તે યોગી ડિવાઇન સોસાયટીના ઉપક્રમે આજે આત્મીયધામ- વડોદરા ખાતે આત્મીય પોઝિટિવ કેર- પોસ્ટ કોવિડ સેન્ટરનો ગાંધીનગરથી ઇ-પ્રારંભ કરાયો હતો.
મુખ્યમંત્રીશ્રી રૂપાણીએ વિશ્વાસ સાથે જણાવ્યું હતું કે, સાફ નિયત, સાચી દિશા અને પરિશ્રમની પરાકાષ્ઠા સાથે રાજ્ય સરકાર કોરોના સામે જંગ જીતવા સતત કાર્યરત છે. કોરોનાની બીજી લહેરમાં રાજ્ય સરકારે યુદ્ધના ધોરણે છેલ્લા મહિનામાં બેડની સંખ્યા ૪૧ હજારથી વધારીને ૧ લાખ કરવામાં આવી છે. જ્યારે ઓક્સિજન બેડની સંખ્યા ૧૮ હજારથી વધારીને ૫૮ હજાર કરવામાં આવી છે. રાજ્ય સરકારના સઘન પ્રયાસોથી ૨,૦૦૦ જેટલી હોસ્પિટલોમાં દૈનિક ૧૧૦૦ ટન ઓક્સિજનનો ૨૪ કલાક અવિરત પ્રવાહ પુરો પાડવામાં આવી રહ્યો છે.


નવા નવા ઓક્સિજન પ્લાન્ટ પણ સ્થાપવામાં આવી રહ્યા છે. આ ઉપરાંત છેલ્લા એક માસના ગાળામાં ગુજરાતની વિવિધ હોસ્પિટલોમાં કોરોનાના દર્દીઓ માટે રાજ્ય સરકારે ૭ લાખથી વધુ રેમડેસિવર ઇન્જેક્શન ઉપલબ્ધ કરાવીને દર્દીઓને સુવિધા પુરી પાડી છે જેના પરિણામે આજે ગુજરાતમાં કોરોનાના નવા કેસ કરતાં વધુ દર્દી સાજા થઈને ઘરે જઈ રહ્યા છે તેમ તેમણે ઉમેર્યું હતું.
મુખ્યમંત્રીશ્રીએ કહ્યું હતું કે, ગુજરાત સરકારે કોરોના સંક્રમણને ગામમાં જ દબાવી દેવા માટે ગત તા, ૦૧ મેથી “મારુ ગામ કોરોના મુક્ત ગામ” અભિયાનનો પ્રારંભ કર્યો છે. જેમાં ગામમાં સર્વેલન્સ કરીને તાવ, શરદી, ઉધરસ જેવા લક્ષણો ધરાવતાં લોકોને અલગ કરીને તેમનો કોરોના ટેસ્ટ કરાવવામાં આવે છે અને જો તેમાં કોઇ પોઝિટિવ આવે તો ગામના કોમ્યુનિટી કોવિડ કેર સેન્ટરમાં તેની અલગથી સારવાર આપીને સંક્રમણને આગળ વધતું અટકાવવાનો પ્રયાસ હાથ ધરાયો છે. આ અભિયાન હેઠળ ખૂબ જ ટૂંકા ગાળામાં રાજ્યના ૩૩ જિલ્લામાં ૧૩,૦૦૦થી વધુ કોમ્યુનિટી કોવિડ કેર સેન્ટર નિર્માણ કરીને ૧ લાખ ૨૦ હજારથી વધુ બેડની વ્યવસ્થા ઉભી કરી છે. ગામના લોકો અને વહીવટી તંત્રના સહિયારા પ્રયાસો, સૌના સહકારથી ગુજરાતમાં કોરોના હારશે અને ગુજરાત જીતશે તેવો વિશ્વાસ મુખ્યમંત્રીશ્રીએ વ્યક્ત કર્યો હતો.
મુખ્યમંત્રીશ્રીએ સંતોના આર્શીવાદ સાથે વિશ્વાસપૂર્વક જણાવ્યું હતું કે, ગુજરાત કોરોનાથી ત્રીજી લહેર માટે અત્યારથી સજ્જ થઈ રહ્યું છે જેના ભાગરૂપે નવા નવા ઓક્સિજન પ્લાન્ટ સહિત જરૂરી વ્યવસ્થાઓ વિકસાવાઇ રહી છે. આપણે વ્યથા નહી વ્યવસ્થા સાથે આગળ વધી રહ્યા છીએ એટલે કોરોના સામેનો જંગ આપણે જીતી રહ્યા છીએ.


મુખ્યમંત્રીશ્રીએ કહ્યું હતું કે, પૂજ્ય સંતોના આર્શીવાદથી શરૂ કરેલું આત્મીય પોઝિટિવ કેર સેન્ટર કોરોનાના દર્દીઓમાં આત્મ વિશ્વાસનો નવો સંચાર કરશે. આ સેન્ટર કોરોના બાદ માનસિક અને હતાશ થયેલા લોકોને નવું મનોબળ પુરૂ પાડવામાં મહત્વની ભૂમિકા ભજવશે. ભગવાન સ્વામિનારાયણે પણ વન વિચરણ દરમિયાન રોગીઓની સેવા કરી હતી. શિક્ષાપત્રીમાં પણ માંદા-રોગી જનની આજીવન સેવા કરવાના શિખ આપેલી છે જેને આજે સાચા અર્થ યોગી ડિવાઇન સોસાયટીના માધ્યમથી આપણે અપનાવી રહ્યા છીએ, આપણે આ સેવાના સંસ્કાર જાળવી રાખ્યા છે તેમ જણાવી મુખ્યમંત્રીશ્રીએ સેવા કાર્ય બદલ સૌને અભિનંદન પાઠવ્યા હતા.


પૂજ્ય પ્રેમ સ્વરૂપ સ્વામીએ આર્શીવાદ આપતાં કહ્યું હતું કે, લોકો અને સમાજની સેવા કરવી એ જ અમારો મુખ્ય ફરજ છે. ભગવાનના આર્શીવાદ અને સૌના સહયોગથી આપણે આ કોરોના સામેનો જંગ જલદીથી જીતશું અને ગુજરાતને કોરોના મુક્ત બનાવીશું.
સાંસદ અને ગુજરાત ભાજપ પ્રદેશ પ્રમુખ સી. આર. પાટિલે આત્મીય પોઝિટિવ કેર સેન્ટર શરૂ કરવા બદલ સંતશ્રીઓ અને યોગી ડિવાઇન સોસાયટીનો આભાર માન્યો હતો.
પૂજ્ય ત્યાગવલ્લભ સ્વામીએ આત્મીય પોઝિટિવ કેરની કામગીરીની રૂપરેખા આપીને સૌને માહિતગાર કર્યા હતા.
આ પ્રસંગે વડોદરાના મેયરશ્રી કેયુરભાઇ રોકડીયા, વડોદરાના OSD શ્રી ડૉ. વિનોદ રાવ, ભાજપના મહામંત્રી શ્રી ભાર્ગવભાઇ ભટ્ટ, જિલ્લા ભાજપ પ્રમુખશ્રી સહિત પૂજ્ય સંતગણ અને ભક્તો ઓનલાઇનના માધ્યમથી સહભાગી થયા હતા.



Friday, April 30, 2021

आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें-----Online Telephonic Ayurveda Free Consultation for Covid-19 Positive Patient




Online Telephonic Ayurveda Free  Consultation for Covid-19 Positive Patient

आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें

    कोरोनावायरस संक्रमण वर्तमान समय में लोगों के बीच जंगल की आग की तरह फैल रहा है। जिससे अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की भारी कमी हो चुकी है। जिससे कि आज की इस बहुत ही गंभीर  स्थिति में सबसे जरूरी कोरोना पॉजिटिव दर्दी के लिये योग्य सलाह मिले इसलिये  free टेलीफोनिक आयुर्वेद consultation शुरू किया है । जिसमे संक्रमण के शुरुआत में ही या पहला लक्षण दिखाई देने पर उसी दिन से ही  वर्तमान दवा के साथ आयुर्वेदिक औषधियां और आयुर्वेदिक कोविड आहार योजना को उस दिन से शुरू किया जा सकता है। जिससे  कोविड संक्रमित रोगी या परिवार के किसी सदस्य को न्यूमोनिया या ऑक्सीजन की कमी के कारण होती hypoxia जैसी प्राणघातक अतिगंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है और टाला  भी जा सकता है।


आयुर्वेद का एक हिस्सा रसशास्त्र के नाम से  पूरे क्षेत्र को कवर करता है। जिसमें मुख्य रूप से रस औषधि का उपयोग किया जाता है। रसऔषधि को  चिकित्सा आपात स्थितियों में उपयोग किया जाता है। और उन की कम खुराक और आयुर्वेदिक उपचार के पहले दिन बहुत जल्दी परिणाम के रूप में दिया जा सकता है।


कोरोना वायरस एक घातक वायरस है जो ऊपरी श्वसन पथ (नाक, साइनस और गले) या निचले श्वसन पथ (ब्रांकाई और फेफड़े) को संक्रमित करता है।इस घातक वायरस से गंभीर निमोनिया, श्वसन विफलता, हृदय की समस्याएं, सेप्टिक शॉक और मृत्यु हो सकती है। कई शीर्ष आयुर्वेद विशेषज्ञ वर्तमान में कई अमृत जैसी जड़ी-बूटियों और शक्तिशाली आयुर्वेदिक  एंटीवायरल और इम्यून-बूस्टिंग आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग अस्पताल में भर्ती या आईसीयू रोगियों की जान बचाने के लिए कर रहे हैं। और अगर समय पर शुरू किया गया तो वे ऑक्सीजन बढ़ाते हैं। फेफड़ों में फाइब्रोसिस को रोकते हैं। और अस्पताल से जल्दी ठीक करने में कारगर है। ऐसे आपातकाल के मामले में, बेहतर परिणामों के लिए, अपने आयुर्वेद विशेषज्ञ से संपर्क करें और तुरंत उपचार शुरू करें।


सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए, इसे केवल आयुर्वेद विशेषज्ञों के अधीन लेने की सलाह दी जाती है।

यदि आप कोविड से संक्रमित हैं, तो आपको डरने की ज़रूरत नहीं है। यदि आपको कोई लक्षण दिखाई देता है। तो  तुरंत अपने पास के किसी भी डॉक्टर या आयुर्वेदिक उपचार के लिए अथवा हमसे संपर्क करें और उचित मार्गदर्शन के लिए निम्नलिखित ऑनलाइन टेलीफोन नंबर पर हमसे संपर्क करें।


 
LOKRAKSHAK HEALTH CARE
  ALAKAPURI SOCIETY 
NEAR SHIVAJI CHAUK 
VIJALPORE NAVSARI -396445 GUJARAT 
Dr R.R.Mishra
Ayurveda & Naturopathy Consultant 
MOBILE & Whatsapp-  9898630756
9007850786 
 

આયુર્વેદ અપનાવો સ્વસ્થ રહો....*Online Telephonic Ayurveda Naturopathy Consultation for Covid-19 Positive Patient*



*Online Telephonic Ayurveda Naturopathy Consultation for Covid-19 Positive Patient*

આયુર્વેદ અપનાવો સ્વસ્થ રહો
સ્વદેશી અપનાઓ રોગ ભગાઓ

     વર્તમાન સમય માં કોરોના વાયરસનું સંક્રમણ ભયંકર રીતે લોકો માં ફેલાયી રહ્યું છે. જેથી હોસ્પિટલો માં ઓક્સીજન અને બેડ, ઇન્જેક્શન સાથે તબીબોની ગંભીર અછત ઉભી થયી છે.અને ખાનગી હોસ્પિટલોનો બિલ દરેકને પોષાય એવો નથી.  જેથી અત્યારના આ ખૂબ અતિગંભીર પરિસ્થિતિ માં સહુ થી જરૂરી કોવિડ દર્દી માટે યોગ્ય માર્ગદર્શન મળે સાથે સાથે સામાન્ય રીતે પોતાના ઘરે સારવાર લઈ સાજા થવા  તે હેતુસર ટેલેફોનિક આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર Consultation શરૂ કરેલ છે.જેમાં સંક્રમણની શરૂઆતમાં કે જે દિવસે લક્ષણો દેખાય એ દિવસથી જ તમારી ચાલુ દવાની સાથે આયુર્વેદિક ઔષધિઓ અને આયુર્વેદિક કોવિડ ડાયેટ પ્લાન તમારા નજીકના આયુર્વેદ ચિકિત્સકની સલાહ થી ચાલુ કરી શકાય. જેથી કોવિડ દર્દીને કે તમારા પરિવારના કોઈ પણ સભ્યને ન્યૂમોનિયા કે ઓક્સીજનની ગંભીર ઉણપના લીધે ઉત્પન્ન થતી પ્રાણઘાતક hypoxia જેવી ગંભીર પરિસ્થિતિમાંથી બચી કે ટાળી શકાય.


            આયુર્વેદનો એક ભાગ મુખ્યત્વે રસઔષધિ તરીકે ઓળખાતા  ફાર્માસ્યુટિકલ પ્રિપેરેશન્સના આખા ક્ષેત્રને આવરી લે છે. રસ ઔષધીનો  મેડિકલ emergency માં ઉપયોગ કરવામાં આવે છે.  અને તેમની ઓછી માત્રા અને આયુર્વેદની સારવારના પ્રથમ દિવસે જ ખૂબ જ ઝડપી પરિણામના કારણે કોઈપણ તબીબી કટોકટીની સ્થિતિમાં આપી શકાય છે.

     કોરોના વાયરસ એ જીવલેણ વાયરસ છે. જે ઉપલા શ્વસન માર્ગ (નાક, સાઇનસ અને ગળા) અથવા નીચલા શ્વસન માર્ગ (શ્વાસનળીઅને ફેફસાં) માં ચેપ લાવે છે.આ જીવલેણ વાયરસ ઘાતકી ન્યૂમોનિયા , શ્વસન તંત્ર નું failure , હૃદયની સમસ્યાઓ, સેપ્ટિક શોક અને મૃત્યુ તરફ દોરી શકે છે. હાલમાં ઘણા ટોચના આયુર્વેદ નિષ્ણાતો જીવન બચાવવા અનેક  અમૃત સમાન રસ ઔષધિઓ અને શક્તિશાળી એન્ટિવાયરલ અને રોગપ્રતિકાર શક્તિ વધારનાર  આયુર્વેદની દવાઓ પણ હોસ્પિટલમાં દાખલ અથવા આઇસીયુ દર્દીઓમાં વાપરી રહ્યા છે.જો તે  સમયસર શરૂ કરવામાં આવે તો તેઓ ઓક્સિજનને વધારે છે. તેઓ ફેફસામાં થતો  ફાઇબ્રોસિસ અટકાવે છે. અને હોસ્પિટલમાંથી વહેલી રજા અપાવે છે. આવી કટોકટીની સ્થિતિમાં વધુ સારા પરિણામ માટે તમારા આયુર્વેદના નિષ્ણાત નો સંપર્ક કરી સત્વરે ચિકિત્સા ચાલુ કરવી. 

સલામતી અને અસરકારકતા માટે ફક્ત આયુર્વેદ નિષ્ણાતોની હેઠળ જ લેવાની સલાહ આપવામાં આવે છે .

જો તમે કોવિડ સંક્રમિત થયા છો તો તમારે ડરવાની જરૂર નથી. તમને થોડા પણ લક્ષણો દેખાય કે તરત જ તમારા નજીક ના કોઈ પણ ડૉક્ટર કે  આયુર્વેદિક અને નૈસર્ગિક ચિકિત્સા માટે અમારો  સંપર્ક કરી યોગ્ય માર્ગદર્શન માટે અમારા નીચે આપેલા ઓનલાઈન ટેલિફોનિક નંબર પર સંપર્ક કરવો.

LOKRAKSHAK HEALTH CARE
ALKAPURI  SOCIETY  NEAR SHIVAJI CHAUK VIJALPORE NAVSARI -396445

Dr R.R.MISHRA
Ayurveda & Naturopathy  Consultant 
Mobile / Whatsapp no 9898630756  
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9328014099










नवसारी विजलपोर नगरपालिका के अधिकारी ईमानदार के ....! तारीख 27/4/21 निरीक्षण करवाने के पत्र को 28/4/21 को रजी. किया ....!








नवसारी जिले में नवसारी नगरपालिका बेहतरीन ईमानदार की छबि काबीलेे तारीफ ...!

तारीख 27/4/21 निरीक्षण करवाने के पत्र को 28/4/21 को रजी. किया ....!

                         आज पिछले एक वर्ष से  कोरोना जैसी महामारी से आज पूरा गुजरात पूरा देश आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। परंतु नवसारी विजलपोर नगरपालिका के शासन प्रशासन के नेताओं और अफसरों को पसंद नहीं है। जिसकी वजह से  नवसारी विजलपोर नगरपालिका में गटरों को साफ करवाना, दारु शराब के अड्डों को दूर करवाना अथवा उनके पास कोमर्सियल वेरा वसूल करना, व्यापार की सूची में लाकर अतिरिक्त टेक्स लेना, सेनेटाइजर करवाना, पावडर का छिड़काव करवाना अभी तक एक उचित नहीं समझते हैं। सरकार के नियमों की मानें तो सचिव अथवा समकक्ष के अलावा किसी भी अधिकारी अथवा कचेहरी में एरकंडीशन की सुविधा उपलब्ध नहीं  है। परंतु नवसारी जिले में नवसारी विजलपोर नगरपालिका के मुख्य अधिकारी अपने अपने कार्यालय में एरकंडीशन लगा कर गैरकानूनी निर्माणों को दूर न करके लाखों करोड़ों रुपए का सरकार को चूना लगवा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कोरोना जैसी महामारी को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो रहे हैं। इसी क्रम में बिन अधिकृत निर्माणों की संख्या में दर रोज जोरदार बृद्धि हो रही है। सूचना का अधिकार अधिनियम2005 हो अथवा सेवा का अधिकार अधिनियम 2013 हो नवसारी जिले में नवसारी विजलपोर नगरपालिका इसका पालन करना गुनाह समझती है। एक तरफ कोरोना महामारी के रूप में दर रोज बढ़-चढ़ कर अपनी संख्या दर्ज कर रही है। वहीं आज सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार को आज दो वक्त रोटी कहां से लायेंगे उसके लिए परेशान हैं। सरकार भले रात दिन मेहनत मसक्कत के साथ करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। परंतु नवसारी जिले में नवसारी विजलपोर नगरपालिका के सदर अधिकारियों को कुछ भी फर्क नजर नहीं आ रहा है। सरकार को बदनाम करने के लिए आज विरोध पक्ष की जरूरत नहीं है। सरकार के अधिकारी ही काफी है। नवसारी विजलपोर नगरपालिका के जांबाज प्रचंड अनुभवी विद्वान वर्ग एक के मुख्य भूमिका में लाखों रुपए वेतन के साथ राजाशाही सुविधाओं से लशालश अधिकारी श्री के पास सरकार के नियमानुसार ऐसे कारनामो की हकीकत लक्षी सूचना मांगी गई थी। परंतु गैरकानूनी एरकंडीशन जिसे आज हर हाल में निकालना जरूरी है। ऐसे अधिकारी समयसर सूचना देना उचित नहीं समझते हैं। जिसके उपलक्ष में अपील की गई। और प्रादेशिक कमिश्नर नगरपालिकाओ जिनके पास 22 नगरपालिकाओ की जवाबदेही है ऐसे प्रथम अपील अधिकारी श्री जो खुद अभी तक ऐसे कई  बड़े बड़े कारनामे कर चुके हैं। सूचना अधिकार अधिनियम एक विराट और जन हित पारदर्शी वाले कानून का उलंघन करते हुए सीधा सीधा नवसारी विजलपोर नगरपालिका के सूचना अधिकारी का बचाव करते हुए सूचना अधिकारी को पुनः निरीक्षण करवा कर आंशिक सूचना मुफ़्त में देने का हुक्म कर दिया। और इसी संदर्भ में नवसारी विजलपोर नगरपालिका के जांबाज अनुभवी सुपर क्लास के अधिकारी आधे घंटे मुफ्त बाद में चार्ज लेने जैसे गुमराह पत्र के साथ  एक बार अरजदार को बुलाया गया और सीधे सीधे निरीक्षण न करवाकर सात दिनों में सूचना भेजने के लिए कह कर मुकर गये। अब सूचना अधिकारी चीफ ओफीसर श्री एक नया पैंतरा शुरू कर चुके हैं। एक पत्र नवसारी विजलपोर नगरपालिका पत्र क्रमांक न वि न जा नं. जामाअ 207 तारीख 22/04/2021 जिसे भारतीय पोष्ट रजी. नं. आरजी 933215635 आई एन कालियावाडी में तारीख 28/04/2021 समय 12:00 देकर तारीख 27/4/2021 को निरीक्षण करने का हुक्म देकर उसे तारीख 28/04/2021 को रजी किया है। और यह रजी पत्र अरजदार को तारीख 29/4/ 20 21को मिला है। अब इसे अरजदार को तारीख पर हाजिर न होने की वजह से रद्द कर दिया जाएगा। और यह प्रोग्राम और प्रयोग ऐसे पहले कई बार कर चुके हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में सीधे जवाबदार अधिकारी आज गुजरात सरकार को ही नहीं अपितु अपने आप को धोखा दे रहे हैं। शायद सदर सूचना अधिकारी श्री को ज्ञात नही है कि इसके पहले ऐसा कई बार कई गुमराह करने वाले अधिकारी ठीक ऐसे मामलो में कर चुके हैं। और आज भी बिन अधिकृत निर्माण की गुजरात सतरकता आयुक्त की जांच में तत्कालीन चिफ ओफिसर दोषी पाये गये और उन पर अभी मुकदमा और कार्यवाही बाकी है।यह कहानी फिर से समय दोहरा रहा है। यह भी जानना जरूरी है कि सरकार के पास नोट छापने वाली मशीन नहीं है। और न ही सरकार अवैध संपत्ति को रखने का किसी को अधिकार देती है। एक एक रुपया गरीब वंचित आदिवासी महिलाओं मजदूरों किसानों आर्थिक पिछड़े तंगी से जूझ रहे लोगों का है। सरकार की तिजोरी से वेतन लेने वाले सभी अधिकारी नोकरशाह है। संवेदनशील रहना आज निहायत जरुरी है।अन्यथा समय इसका जवाब जरूर देगा ।


    आज सरकार की कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना एक सफल और कोरोना जैसी महामारी में अमृत समान है। सरकार की ऐसी सफल योजना को सभी अधिकारियों को लागू करने वाले निर्देश को पालन न करना एक हिटलरशाही को सूचित कर रहा है।कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना जिसमे 21000/-तक के सभी मजदूरों और कर्मचारियों को सुविधा दिलवाने की जवाबदेही तय है।सातवां वेतन विजलपोर नगरपालिका में देने का हुक्म को अभी तक न देना, निवृत्त कर्मचारियों को उनके मिलने वाले हक को न दिलवाना, लघुत्तम मासिक वेतन मजदूरों कर्मचारियों को न देना सीधे सीधे गुनाह और पाप की श्रेणी में आता  है। अब ऐसे अधिकारियों को जो सरकार को बदनाम ही नहीं एक गुनाह भी कर रहे हैं उन्हें सरकार गंभीरता से यदि लेने में देर करती है फिर न्यायालय में और राज्यपाल की जवाबदेही बनती है। और सूत्रों के हवाले से तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्यवाही की मांग होना निश्चित है। वैसे गुजरात सतर्कता आयुक्त को ऐसी सभी व्यवस्थाएं करवाने के लिए सूचित किया जाने की लोकचर्चा आज देखी जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नवसारी विजलपोर नगरपालिका के संबंधित सभी अधिकारी ऐसी हालत में सहयोग करते हैं कि भाई भाई की भूमिका में गैरकानूनी एरकंडीशन में भयभीत होकर कोरोना का बहाना बना कर टाइमपास। जयश्री राम 


Wednesday, April 28, 2021

નવસારી જિલ્લામાં વાયરસ સંક્રમિત દર્દીઓ માટે ખુશખબર...!



નવસારી જિલ્લામાં વાયરસ સંક્રમિત દર્દીઓ માટે ખુશખબર...!
      
        નવસારી જિલ્લામાં કોરોના મહામારી ચરમસીમાએ રાજ કરી રહ્યુ છે.સરકારી અને ખાનગી હોસ્પીટલો માં બેડ વેન્ટિલેટર ઓક્સિજન ઇન્જેક્શન કે તબીબો પુરતુ પ્રમાણમાં ન હોવાથી આજે માનવજીવન ત્રાહિમામ પોકારી ઉઠ્યા છે.અને રોજેરોજ સંક્રમિત દર્દીઓની સંખ્યા માં ભરખમ વધારો જોવા મળી રહ્યો છે.શાસન પ્રશાસન રાત દિવસ મહેનત કરી રહ્યો છે. જનતા કર્ફ્યૂ સ્વૈચ્છિક લોકડાઉન કે રાત્રે કરફ્યુ માં નાગરિકોના સાથ સહકાર હોવા છતાં આજે એક ભયનો માહોલ સર્જાયો છે.સતત રોજી રોજગાર બંધ રહેવા થી ભુખમરી, બેરોજગારી , ભ્રષ્ટાચાર,  કાળાબજારી વધી રહ્યુ છે.અને વાયરસ સંરક્ષણ માટે સરકાર દ્વારા નવી ગાઈડ લાઈન સાથે તમામ પ્રયાસો કરી રહી છે. છતા હજુ સુધી વિશ્વ આરોગ્ય સંસ્થાના અહેવાલ મુજબ કોઈ મક્કમ દવા મળી નથી ફક્ત મેડિકલ ટ્રાયલ બેઝ ઉપર સારવાર આપવામાં આવે છે.આધુનિક ચિકિત્સા પદ્ધતિ એલોપેથી માં દરેક સંક્રમિત નાગરિકોની સારવાર માટે વ્યવસ્થા પુરતુ સાથે દરેક નાગરિકો માટે શક્ય નથી.લાખો રુપિયાનો બિલ ખાનગી હોસ્પિટલોમાં ભરવો એ સામાન્ય અને મધ્યમ વર્ગના નાગરિકો માટે કોઈ પણ સંજોગોમાં સંભવ નથી.આજે માનવીય ચિકિત્સા માટે એક સર્વે મુજબ ત્રણ સૌ પદ્ધતિઓ છે.જેમા એલોપેથી ચિકિત્સા પદ્ધતિ સૌથી નવી પદ્ધતિ છે.અને અન્ય તમામ પદ્ધતિઓ માં હાલના તબક્કે સ્વદેશી ચિકિત્સા પદ્ધતિ આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર પદ્ધતિ સૌથી વધુ કારગર પદ્ધતિ સાબિત થઇ રહી છે. અને આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર પદ્ધતિ માં કોઈ પણ સંજોગોમાં મોટા ભાગે આડ અસર નથી.અને આજે પણ મોટા ભાગના ગ્રામ્ય વિસ્તારોમાં આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર પદ્ધતિ થી સૌથી વધુ પ્રમાણમાં નાગરિકો સારવાર લઈ સાજા થઈ રહ્યા છે.

         સ્વદેશી આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર પદ્ધતિ સૌથી વધુ કારગર પદ્ધતિ છે.અને સામાન્ય થી સામાન્ય નાગરિકો એ પદ્ધતિ થી સારવાર લઈ શકે છે. જેથી સામાન્ય મધ્યમવર્ગના નાગરિકો માટે ગભરાઈ જવાની જરૂર નથી.સબ્ર અને વિશ્વાસ સાથે સ્વદેશી આયુર્વેદિક નૈસર્ગિક ઉપચાર રૂષિ મુનિઓ દ્વારા શોધ કરેલ દવાઓના પ્રયોગ થી લાખો દર્દીઓ સારવાર લઈ સાજા થઈ રહ્યા છે.આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર પદ્ધતિ થી સારવાર આપવા માટે તબીબોના સંપર્ક એક સારો વિકલ્પ છે.
લોકરક્ષક હેલ્થ કેયર નવસારી દ્વારા આયુર્વેદ નૈસર્ગિક ઉપચાર કેન્દ્ર માં સંપર્ક કરી દવાઓ અને માર્ગદર્શન મેળવી શકાય છે. 


Thursday, April 22, 2021

નવસારી જિલ્લા આયુર્વેદ અધિકારી શ્રીમતી ડો.નયના પટેલ અને ટીમ દ્વારા ઉકાળા વિતરણ




નવસારી જિલ્લા આયુર્વેદ અધિકારી શ્રીમતી ડો.નયના પટેલ અને ટીમ દ્વારા ઉકાળા વિતરણ

નવસારી જિલ્લામાં કોરોના વૈશ્વિક મહામારી સામે લોકોની રોગપ્રતિકારક શક્તિ વધે તે માટે માન. જિલ્લા વિકાસ અધિકારી નવસારીની સૂચના અન્વયે જિલ્લા આયુર્વેદ અધિકારી ડૉ.નયના પટેલના માર્ગદર્શન હેઠળ આયુષ ટીમ નવસારી દ્વારા નવસારીના જુદા જુદા સ્થળોએ આયુર્વેદિક ઔષધિય ઉકાળા વિતરણની કામગીરી શરુ કરવામાં આવી છે. જેમાં વાંસદા તાલુકા માં આયુષ ટીમ અને RSS વાંસદાના સ્વયસેવકોના સહયોગ થી તા. 20/4/21 થી 24/4/21 સુધી જલારામ મંદિર ના હોલમાં ઉકાળો તૈયાર કરી વાંસદા ના દરેક ફળીયા મા સ્વયં સેવકો દ્વારા ઘરે જઈ ડોર ટુ ડોર ઉકાળા વિતરણની કામગીરી ચાલુ છે આ ઉપરાંતઆયુષ ટીમ દ્વારા વાંસદા ના આજુબાજુના ગામોમાં ઉનાઈ, સુખાબારી, ઉપસલ, ચઢાવ ગંગપુર, હનુમાનબારી, અંકલાછ માં પણ ઉકાળા વિતરણની કામગીરી હાલમાં ચાલુ છે. નવસારી જિલ્લા આયુર્વેદના તમામ તબીબો સાથે ટીમની કામગીરી કાબીલે તારીફ છે. અને આયુર્વેદ ઔષધીય ગુણો થી ભરપુર ઉકાળો કોઈ પણ આડ અસર વગર અમૃત સમાન છે. ઉકાળો પીવાથી રોગ પ્રતિકારક શક્તિ માં વધારો થાય છે. ઉકાળો બનાવી ઘરે ઘરે પહોંચતું કર્યું એના બદલ પ્રતિષ્ઠિત અને જાગૃત નાગરિકો આભાર વ્યક્ત કર્યો છે. 

Wednesday, April 21, 2021

राष्ट्रीय हिंदु संघ नवसारी द्वारा रक्तदान शिविर संपन्न




राष्ट्रीय हिंदु संघ नवसारी द्वारा रक्तदान शिविर संपन्न    
     राष्ट्रीय हिन्दू संघ नवसारी जिला की ओर रामनवमीे के पावन पर्व पर कोरोना की वैश्र्विक महामारी के बचाव में नवसारी जिला की तरफ से रक्त दान (ब्लड डोनेट) कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमेंं राष्ट्रीय हिन्दू संघ नवसारी जिला के पदाधिकारियों ने अपनी अपनी ओर से जोरदार प्रयास कर, 30, युनिट रक्त एकत्रित किया ओर राजेश गोहिल को भी कोरोना की वज़ह से देहांत हुऐ उनके अग्नि संस्कार करने हेतु राजेश गोहिल का भी संघ द्वारा सन्मान किया गया ।इस कार्यक्रम में सभी पदाधिकारियों सभ्य उपस्थिति रहे। और सभी ने मिलकर राम नवमी के पावन पर्व पर जय श्री राम के नारे लगाए। नवसारी जिले में एक तरफ जहां कोरोना एक महामारी के रूप में आज अपने चरमसीमा पर पहुंच चुका है।चारों तरफ आज लोग त्राहिमाम हो चुके है। देश में पहली बार शासन प्रशासन निष्फल नजर आ रहा है। अस्पतालों में कहीं ओक्सीजन बेड इंजेक्शन वेंटीलेटर की भारी कमी है। ऐसी हालत में रक्तदान जीवनदान से कम नहीं है। और आज राष्ट्रीय हिंदु संघ के सभी पदाधिकारी एवम सभासद आज मानवता मानव सेवा प्रभु सेवा को लक्ष्य मानकर रात दिन सेवा करने में अग्रसर है। और रक्त दान में आज सभी पदाधिकारियों एवम रक्त दाताओं ने  अग्रणी भूमिका निभाई है।ऐसे नेक कार्य करके मानस रूपी जीवन रेखा को धन्य बनाया है। और इस पवित्र कार्य में सभी पदाधिकारियों सभासदों नेेअपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिसमे उपस्थित पदाधिकारी  
1,डॉ.आर.आर.मिश्रा (गुजरात प्रदेश उपाध्यक्ष)
2,नागेश गोहिल, (अध्यक्ष)
3,अरुणा बेनभोर (महिला मोर्चा अध्यक्ष)
4,मुकेश दैया( कार्यकारी अध्यक्ष)
5,दिव्येश शर्मा (उपाध्यक्ष)
6,राजेश गोहिल (उपाध्यक्ष)
7,अरुण सूर्यवंशी (प्रवक्ता)
8,गणेश कोली (संगठन मंत्री)
9,सुनीलभाई पाटिल (कोषाध्यक्ष)
10,सैलेष शाह (महासचिव)
11,दिलीप भाई सेठ (महासचिव)
12,नयनाबेन पवार (महिला मोर्चा महासचिव)
13,प्रवीण भाई दरजी (सचिव)
14,राजेश भाई दरजी (सचिव)
15,रविकांत भाई भोर (कोषाध्यक्ष)
16,अशोक भाई दरजी (सभ्य)
17,नेमिल महेता (सभ्य)
18,क्रोनिल दफ्तरी (सभ्य)
19,अनुराग शाह (सभ्य)
20,दिनेश गोहिल (सभ्य)
21,जीतू भाई सेन (सभ्य)
22,आषिश शाह (सभ्य) 
आदि ने विशिष्ट योगदान दिया। 
जय श्री राम 

Sunday, April 18, 2021

નવસારી જિલ્લામાં કોરોના માટે હોસ્પિટલોની યાદી



નવસારી જિલ્લા વહીવટી તંત્ર દ્વારા કોરોનાગ્રસ્ત વ્યક્તિઓની
સારવાર માટે ૧૮ હોસ્પિટલોમાં 
હેલ્પ ડેસ્ક શરૂ

 નવસારી જિલ્લાની ૧૮ હોસ્પિટલોમાં કોરોના ગ્રસ્ત વ્યક્તિઓની સારવાર માટે હેલ્પ ડેસ્ક શરૂ કરવામાં આવી છે. બેડની વ્યવસ્થા હોઇ દર્દીઓ અને હોસ્પીટલોની રજૂઆતો ઉપર દેખરેખ રાખવા જિલ્લા વહીવટી તંત્ર નવસારી દ્વારા સુચારૂ આયોજન કરવામાં આવ્યું છે.
નવસારી જીલ્લામાં વધતાં જતાં શંકાસ્પદ અને પોઝીટીવ દર્દીઓની સંખ્યાને ધ્યાને લઈ નીચે મુજબની હોસ્પિટલોમાં કોવિડ-૧૯ દર્દીને દાખલ કરતાં પહેલા હોસ્પિટલની સામે દર્શાવેલ હેલ્પડેસ્ક નં/જવાબદાર કર્મચારી/ અધિકારી ને ફોન દ્વારા સંપર્ક કરી હોસ્પિટલમાં દાખલ કરવા માટે પથારીની ઉપલબ્ધિ છે કે નહિ તે જાણી દર્દીને રીફર કરવા જેથી દર્દીને એક હોસ્પિટલથી બીજી હોસ્પિટલમાં રખડવું ન પડે.


હોસ્પિટલ નું નામ હેલ્પ ડેસ્ક નં

સિવિલ હોસ્પિટલ નવસારી ૯૬૮૭૬૮૫૯૩૧

સબ ડીસ્ટ્રીક્ટ હોસ્પિટલ ચીખલી ૭૨૦૨૮૨૧૬૩૪

યશફીન હોસ્પિટલ નવસારી ૯૩૨૭૬૬૦૧૧૨

કે.ડી.એન.ગોહિલ હોસ્પિટલ નવસારી ૭૯૯૦૧૦૬૩૦૦

ઓરેન્જ હોસ્પિટલ નવસારી ૯૮૭૯૨૦૫૯૯૫, ૭૬૦૦૧૮૯૦૯૮

લાયન્સ હોસ્પિટલ નવસારી ૯૯૭૪૩૧૫૪૯૮

કેજલ હોસ્પિટલ નવસારી ૯૨૬૫૩૭૧૧૭૭, ૯૩૨૮૫૯૪૬૯૩

શ્રધ્ધા હોસ્પિટલ નવસારી ૭૦૬૯૫૮૮૨૨૨

સ્પંદન હોસ્પિટલ ચીખલી ૮૧૪૦૩૨૮૦૦૦, ૮૧૪૦૩૧૮૩૩૩

પારસી હોસ્પિટલ નવસારી ૯૪૨૮૧૬૧૦૫૪, ૯૦૯૯૪૫૫૦૮૧

યુનિટી હોસ્પિટલ નવસારી (૦૨૬૩૭) ૨૫૭૨૫૧, ૯૩૨૮૧૦૧૮૬૯

શુશ્રુષા હોસ્પિટલ નવસારી (૦૨૬૩૭) ૨૫૨૨૦૮, ૨૫૦૭૭૭

દમણીયા હોસ્પિટલ ગણદેવી (૦૨૬૩૪) ૨૬૨૬૫૩

આનંદ હોસ્પિટલ ચીખલી (૦૨૬૩૪) ૨૩૧૩૦૧, ૯૪૨૯૧૪૩૯૮૭

આલીપોર હોસ્પિટલ ચીખલી ૮૮૬૬૨૨૬૦૮૭

શિવાય હોસ્પિટલ ચીખલી (૦૨૬૩૪) ૨૩૦૦૭૫, ૭૩૫૯૨૧૮૩૬૪

શિવમ હોસ્પિટલ વાંસદા (૦૨૬૩૦) ૨૨૨૦૮૪, ૨૨૩૦૮૫

ઉદિત હોસ્પિટલ વાંસદા ૯૯૯૮૧૨૬૮૮૧

જે વ્યક્તિ કુંભ મેળામાંથી પરત ફરી હોય તેમણે ડિઝાસ્ટર શાખા નવસારીના કંટ્રોલ રૂમ નં ૦૨૬૩૭-૨૩3૦૦૨ અથવા ટોલ ફ્રી નંબર ૧૦૭૭ ઉપર જાણ કરવાની રહેશે અથવા જેમને માહિતી મળી હોય તેમણે આપેલ કંટ્રોલ રૂમ નંબર ઉપર જાણ કરવાની રહેશે.



નવસારી નગર નિયોજક કચેરી ના પર્દાફાસ -આર .ટી .આઈ.

નવસારી નગર નિયોજક કચેરી ના પર્દાફાસ -આર .ટી .આઈ. નવસારી જિલ્લા માં નગર નિયોજક અને મુલ્યાંકન વિભાગ માં સરકાર શ્રી અને નાગરિકો ના કરોડો રૂપિયા...