जीवन में सूर्य प्रकाश का महत्व जानिए..
आज मानव जीवन मे सूर्य भगवान का महत्व समझने की अधिक आवश्यकता है। वैसे तो आधुनिक वैज्ञानिक सिर्फ़ सूर्य को एक ग्रह के रूप मे ही जानते हैँ। परंतु हमारे शास्त्रों मे एक देवता और भगवान के रूप मे माना जाता है। और रामायण मे आचार्य तुलसी दास ने लिखा है जाकी रही भावन जैसी । प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।।
मानो तो भगवान अन्यथा पत्थर।
और आज आधुनिक वैज्ञानिक धर्मों की बहुत सारे वचनों को खोजा और लगभग सभी सत्य पाये गये।
आज आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति ने मानव जीवन को लगभग एक मरीज असाध्य रोगी बनाने मे अच्छी भूमिका निभा रहा है। और अब हमे धर्म और विज्ञान को एक साथ समन्वय कर जीवन जीने की कला सीखना होगा।
सूर्य हमारे मानव शरीर मे आत्मा के समान कार्य करता है। जठराग्नि सूर्य से ही क्रियान्वित होती है। असाधारण असाध्य बीमारियों को सूर्य की किरणें जड मूड से खत्म करने मे प्रमुख भूमिका निभाती है।
सूर्य एक प्राकृतिक चिकित्सालय है। सूर्य की सप्तरंगी किरणों में अद्भुत रोगनाशक शक्ति है।
सुबह से शाम तक सूर्य अपनी किरणों, जिनमें औषधीय गुणों का अपार भंडार है, अनेक रोग उत्पादक कीटाणुओं का नाश करता है।
टीबी के कीटाणु उबलते पानी से भी जल्दी नहीं मरते, वे सूर्य के तेज प्रकाश से शीघ्र नष्ट हो जाते हैं। फिर दूसरे जीवाणुओं के नाश होने में संदेह ही क्या है।
स्वस्थ रहने के लिए जितनी शुद्ध हवा आवश्यक है, उतना ही प्रकाश भी आवश्यक है। प्रकाश में मानव शरीर के कमजोर अंगों को पुनः सशक्त और सक्रिय बनाने की अद्भुत क्षमता है। इस तरह सूर्य प्रकाश अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन के लिए आवश्यक है।
सूर्य के प्रकाश का संबंध सिर्फ गर्मी देने से नहीं है। इसका मनुष्य के आहार के साथ भी घनिष्ठ संबंध है।
छोटे-बड़े पौधे व वनस्पतियों के पत्ते सूरज की किरणों के सान्निध्य से क्लोरोफिल नामक तत्व का निर्माण करते हैं। इस तत्व के बिना पत्तों में कुदरती हरापन नहीं रहता।
हम खान-पान में प्रायः हरी सब्जियों का प्रयोग करते हैं। इन हरी सब्जियों में ही मानव शरीर के पोषक तत्व रहते हैं।
आइये हम सब मिलकर परमात्मा के अद्भुत भेंट को अपने और अपनों के जीवन मे प्राप्त करने की दिशा मे एक कदम बढाये। और अच्छे और सुन्दर स्वास्थ्य को प्राप्त करने मे मददगार बने।
अधिक जानकारी के लिए समय लेकर एक बार अवश्य मिले।
करिश्मा आयुर्वेदिक आध्यात्मिक चिकित्सा केंद्र
विजलपोर नवसारी गुजरात
संपर्क सूत्र -
9898630756 / 09227850786

