Friday, June 14, 2019

ट्यूशन क्लास से बच्चों को मिलेगा छुटकारा! बच्चों में खुशी का माहोल ! ट्युशन क्लास अवैध ?

ट्युशन क्लास से बच्चों को मिलेगा छुटकारा! बच्चों में खुशी का माहोल ! ट्युशन क्लास अवैध ?
  शिक्षको की जवाबदारी बढी.? ट्युशन मुक्त शिक्षण की शुरूवात .! 
                 
           नवसारी जिले में ट्यूशन क्लास मालिको को एन ओ सी के बाद ही शुरुआत करने वाले सरकार के फैसले ने अच्छे दिन आ गये वाले सपने को सच साबित होगा । ऐसी संभावनाए सच होती दिखने लगी हैं। साथ ही साथ आज तक चल रहे इस धंधे का पर्दाफाश हो गया है। जिसकी सरकार में किसी भी प्रकार का कोई विभाग है। न ही ऐसी किसी अधिकारी को मनोनीत किया गया है। इसका कोई लाइसंस भी किसी के पास पाया नही गया। और किसी भी अधिकारी के द्वारा इस धंधे को मान्यता देने की सत्ता भारत में नही है। सूरत जिले मे हुई बच्चोकी करुण मौत से आज भी सरकार के साथ पूरा देश सहमा हुवा है। लाखो नागरिकों ने सीधे एक अभियान के तहत सीधे प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। गुजरात की शिक्षा प्रणाली पहले से आखिरी पायदान की तरफ उतर रही थी । अब यह सुधरेगी अथवा सीधे मैदान से बाहर । यह बहुत ही दिलचस्प होग। प्राथमिक शिक्षा पद्धति आज गुजरात मे एक रिपोर्ट के अनुसार पैंतीसवे नंबर पर पहले से राज कर रही है। जिसमें सुधार लाने मे सभी सरकारे असफल हो चुकी हैं। आज भी एक नई टेक्निकल शिक्षा पद्धति शुरू करने शिक्षकों को सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के कामो में काम करने ,नये नये शिक्षा संबंधित कामो को अग्रसर करने में सहभागी बनाने के कामों के बदले कुछ अलग दिशा मे गतिमान है। आज गाव के सरपंच से लेकर राष्ट्रपति तक होने वाले सभी पदो में राजनीति में शिक्षण की जरूरत है। न कि शिक्षा में राजनीति की। आज शिक्षको से चुनाव में ही व्यस्त रखने सरकार के अन्य कामो मे लगाया गया है। सभी  मुख्य शिक्षको को करीबन लाखो रूपये वेतन देकर एक सामान्य चपरासी का काम लिया जाता है।शिक्षको की हालत बद से बदतर पाई जाती है। शास्त्रों मे शिक्षक को गुरु और गुरु को भगवान से बडे का दर्जा दिया गया है। असली का सम्मान कम होने की वजह नकली अमान्य शिक्षको ने इसे व्यापार बना दिया। परिवर्तन संसार का नियम है। आज फिर बाजी पलट चुकी है। शिक्षक देश के भविष्य के निर्माता हैं। आज शिक्षको फिर से देश के भविष्य में अपनी भूमिका और सहभागी होने के इस अवसर में आगे आना चाहिए। और सभी अभिभावकों को बिश्वास दिलाने के साथ इस बढ़ते व्यापार से मुक्ति मे मदद करनी चाहिए।अब सरकार इस अवैधानिक व्यापार से मुक्ति दिला पायेगी अथवा गुजरात में दारू बंदी के कायदे की नकल कर कर एक नया व्यापार व्यवस्था की शुरुआत करेगी। इस पर आज सभी की नजर है।

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