Sunday, June 16, 2019

आनंद मय जीवन का रहस्य..


 आनंद मय जीवन का रहस्य..

                 आनंदमय जीवन का रहस्य आज इस भागदौड़ भरी जिंदगी के वर्ष किस तरह गुजर जा रहे हैं। और गुजर गये। समझ में ही नही आया। पहले अपनी शिक्षा में 25 साल गुजर गये। फिर नौकरी फिर अपने भविष्य को सजाने सवारने का टेंसन । साथ ही शादी फिर बच्चों को बडा करना उनकी शिक्षा। फिर उनकी शादी । दूसरे 25 वर्ष गुजर गये। पता ही नहीं चला। और इस आपा धापी भाग दौड़ मे अब तीसरा 25 वर्ष और शायद अंतिम भी इसी तरह ही सब गुजर जायेगा। आनंद मय जीवन जीने की इच्छा हर किसी की होती है। परंतु क्या किसी को प्राप्त हुआ। आज तक हमारी जिंदगी मे रात दिन की तरह सुख और दुःख आये । और गुजर गये।आनंद का पता ही नही। सुख और दुःख यह बाहर से मिलते हैं। और याद रहे जो बाहर से किसी और के द्वारा मिलता है। वह सभी समय के अधीन है। समय के साथ गुजर जायेगा। बचपन भी गया जवानी बुढापा । यहाँ तक कि यह शरीर भी । किसी और से मिली। जिसे भी हम बाहर से पाये वह सभी औरो के साथ समय के अधीनस्थ है। भले ही जिसने दिया वह न मागे परन्तु समय अपने साथ उसे भी ले जायेगा। आनंद आपके भीतर से मिलेगा। उसे आप को स्वयं लाना होगा। उस आनंद का विपरीत कुछ भी नही है। न ही उसके लिए  उसे समझने के लिए कोई शब्द हैं। न ही उसके लिए कोई उदाहरण है । जिसे मिला हम सिर्फ उसका नाम ही जानते हैं। उसे कैसा प्रतीत हुवा होगा । उसे शब्दों मे व्यक्त किया नही जा सकता। दुसरा कोई बता नही पाया । यहाँ तक कि जिसे मिला वह खुद नही बता पाया। मात्र इसारा ही किया जा सकता है। सभी ने सिर्फ इसारा ही किया। और ज्यादातर उन महान आत्माओ ने उसे प्राप्त करने के लिए आनंद को प्राप्त करने के लिए एक शब्द की तरफ जोर दिया है वह है ध्यान... ध्यान और मात्र ध्यान...। ध्यान के लिए आज पूरा शाष्त्र है। ध्यान की आज लाखो विधियां ईजाद की गई है। और उसका आज एक दौड सी चल पडी है। आज सभी दावा कर रहे हैं। जिसे मिला । वह बता नही पाया। उन सभी ने सिर्फ यही कहा कि हम उसे न दे सकते हैं न ही आप ले पाओगे।चोरी और छीना झपटी डकैती नही डाली जा सकती। हम आपको इसारे से बता सकते हैं। जाना आपको स्वयं ही होगा। हम सिर्फ मील के पत्थरों जैसा ही इंगित कर पायेगें। जैसे कही लिखा है यह शहर 1200 कि.मी. । अब जाना आपको है। आज इसकी पुरी मार्केट तैयार है। उसे बेचने और खरीदने वालो की पूरा सहाबा है। न ही बेचने वालो को पता है न खरीदने वाले को। जो बेच रहा है न उसे पता है कि क्या दे रहा है ।क्योंकि उसे बेचने का कोई उपाय ही नही है। उसे कैसे बेचोगे वह कोई वस्तु नही है। और उसे खरीदने वालों को पता नही है क्या खरीद रहे हैं। और बडे़ मजे की बात यह है कि इस व्यवहार और व्यापार में सभी धर्म शामिल हैं। और यह आज सबसे बडे़ व्यापार के रूप में आज चल रहा है। आज इस व्यापार का कोई सर्वे रिपोर्ट भी किसी भी व्यक्ति से लेकर दुनिया के किसी सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं। और यह बडी ईमानदारी का धंधे के रुप में मान्यता बिना किसी के दिये ही मान्य है। और आज तक यही सुनते पाया गया कि सबसे बड़ा और सबसे महान है। शक करने की गुंजाइश भी नहीं है। सरकार भी यही बनाते और बिगाड़ते हैं। फिलहाल भारत में इसके सामने होना मतलब ...उसके सामने लिखने के लिए शब्दावली में शब्द नहीं हैं।

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