Tuesday, June 4, 2019

विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ एक मात्र त्योहार

विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  एक मात्र त्योहार:-आइये हम सब इसमें सहभागी बने 

विश्व पर्यावरण
दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकृति को समर्पित दुनियाभर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है फिर भी हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता है। यह बात चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया।इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था।उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक कदम था। तभी से हम प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आ रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ। उसके जल, वायु, भूमि - इन तीनों से संबंधित कारक तथा मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।
   इसके लिए हमें प्रकृति के नजदीक जाना होगा। इसका सीधा-सा समाधान है बस अपने घर के भीतर व आसपास अधिक से अधिक पेड़-पौधे उगाना।अपने आशियाने के खुले स्थान पर एक मनमोहक बगीचा लगा दिया जाए तो पूरा घर तरोताजा हवा एवं प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर रहेगा और यदि वास्तुशास्त्र में बताए अनुसार पेड़-पौधे लगाते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा का लाभ भी मिलेगा।पेड़-पौधों में भी जीवन होता है अतः इनकी जीवंत ऊर्जा का सही प्रयोग हमें स्वस्थ एवं प्रसन्न रख सकता है। बस केवल आपको यह ध्यान रखना है कि पेड़-पौधे वास्तुशास्त्र की दिशा के अनुरूप हों।
घर में भी लगायें फूल पौधे :- घर के मुख्य द्वार के आसपास एवं पूर्व, उत्तर तथा पूर्वोत्तर दिशाओं की बालकनी पर गुलाब, बेला, चमेली, ग्लेडियोलाई, कॉसमोस, कोचिया, जीनिया, गेंदा और सदाबहार जैसे फूलों के पौधे लगाएं। स्थानाभाव में लोहे या सरिये के स्टैंड में लगे गमलों में भी इन्हें लगाया जा सकता है।

यदि आपका घर है पश्चिम या दक्षिणमुखी -आपको घर के पीछे के खाली स्थान पर पूर्व, उत्तर अथवा पूर्वोत्तर में स्थित हो ऊपर बताए पौधे लगाना चाहिए।जबकि पश्चिम एवं दक्षिणमुखी भवन के आगे या मुख्य द्वार की ओर बड़े-बड़े पेड़-पौधों एवं लताओं का प्रयोग करने के बारे में वास्तुशास्त्र में बताया गया है।

कैसी हो वास्तु दिशा -वास्तु में अनुसार सकारात्मक ऊर्जा तरंगें सदैव पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर, उत्तर दिशा से दक्षिण की ओर एवं पूर्वोत्तर से दक्षिण-पश्चिम के नैऋत्य कोण की ओर प्रवाहित होती हैं।इसलिए पूर्व एवं उत्तर दिशा में केवल हलके, छोटे व कम घने पेड़- पौधे लगाएं, जिससे कि घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा के रास्ते में कोई रुकावट न आए।इन दिशाओं की सकारात्मक बढ़ाने के लिए तुलसी के पौधे लगाएं। तुलसी के आसपास से होकर गुजरने वाली हवा शुद्ध एवं स्वास्थ्यप्रद हो जाती है।
अन्य औषधीय पौधे -इसके अलावा यहां पर अन्य औषधीय पौधे, जैसे- पुदीना, लेमनग्रास, खस, धनिया, सौंफ, हलदी, अदरक के पौधे आदि की उपस्थिति भी हमेशा आपके तन-मन को ताजगी चुस्ती-स्फूर्ति एवं आरोग्य प्रदान करेगी।


 


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